मां शीतला मंदिर में पूजा करने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

बीहट जलेलपुर स्थित मां शीतला मंदिर में नौ दिन की नवरात्रि के बाद चैत्र राम नवमी को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखायी पड़ा.

बीहट. बीहट जलेलपुर स्थित मां शीतला मंदिर में नौ दिन की नवरात्रि के बाद चैत्र राम नवमी को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखायी पड़ा. लोग रविवार की अहले सुबह से ही माता के मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जुटने लगे थे. महिलाओं ने विधि विधान के साथ पूजा कर खोइंछा भरी और परिवार के लोगों के लिए मंगलकामना की. वहीं मां शीतला मंदिर परिसर में चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर रविवार को नवमी के दिन विधि-विधान के साथ 48 छांगड़ों की बलि दी गयी.

मां के दरबार में श्रद्धालुओं का लगा तांता

शुक्रवार की रात जगरना व निशा पूजा के बाद पट खुलते ही लोगों ने मां दुर्गा की प्रतिमा का दर्शन किया. इस मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ चढ़ावा चढ़ाने के लिए उमड़ पड़ी.बताते चलें कि यहां हर साल लगने वाला विशाल मेला,जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते और पूजा पाठ करते हैं.पूजा सह मेला समिति के संयोजक कन्हैया कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष भी माता शीतला मंदिर में चैती दुर्गा पूजा धूमधाम मनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस अवसर पर 6 अप्रैल को भव्य जागरण का आयोजन किया गया है जिसका उद्घाटन बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय सिंहा करेंगे.

मां शीतला की कृपा से मिलती है बीमारी से निजातमंदिर के पुजारी महंत श्री महेश दास जी महाराज ने कहा कि लोकमानस में शीतला मैय्या को चेचक,खसरा, माता निकलने, हैजा, पिलेख व बोदरी जैसी बीमारी से निजात दिलाने वाली देवी का रूप माना गया है.जो लोग इस पूजा को शीतलाष्टमी के दिन किसी कारणवश नहीं कर पाते हैं वो पूरे चैत्र मास के किसी मंगलवार या शनिवार को मां शीतल को जल चढ़ा देने से पुण्य की भागीदारी बन जाते हैं.साथ ही इससे ग्रह, पीड़ा,काल,बीमारी का भी नाश होता है. महंत श्री दास ने बताया कि मां शीतल को सभी देवी-देवताओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है.क्योंकि इनके आगमन के पश्चात किसी देवी-देवताओं का पूजा नहीं होता है.यहां आने वाले हर श्रद्धालुओ की मनोकामना पूर्ण होती है.कोई खाली हाथ नहीं लौटता है.महंत श्री महेश दास ने बताया कि बसीऔरा पर्व के दौरान मां शीतल को बासी भोजन चढ़ने के बाद इस दिन घर में बगैर चूल्हा जले मां शीतल को भोग लगाने की अद्भुत परम्परा है.उसके बाद ही परिवार के सभी सदस्यों को भोजन करना चाहिए.बीहट व सिमरिया समेत आसपास के लोगों को मां शीतल की बसीऔरा पूजा का बड़ा बेसब्री से इंतजार रहता है.मां शीतल मंदिर समिति के सदस्य कन्हैया कुमार के अनुसार वर्ष 1997 के चैत्र माह में माता के मंदिर की स्थापना हुई थी.तबसे हर वर्ष विधि-विधान के साथ माता की पूजा-अराधना की जाती है.यहां आने से श्रद्धालुओं को चेचक, हैजा जैसे बीमारी से छुटकारा मिलता है.खास करके मंगलवार और शनिवार के दिन बेगूसराय समेत कई अन्य जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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By Manish kumar

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