Bankipur By Election Result: बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले करीब 30 वर्षों से भाजपा का गढ़ रही है. इस सीट पर सवर्ण मतदाताओं का बड़ा प्रभाव माना जाता है और भाजपा को हमेशा इसका फायदा मिलता रहा है. लेकिन इस बार जन सुराज के प्रशांत किशोर ने सवर्ण बहुल इलाकों में भी अच्छी बढ़त बनाकर मुकाबले को लगभग एकतरफा कर दिया है. इससे पता चलता है कि भाजपा के परंपरागत वोटों का एक बड़ा हिस्सा जन सुराज की ओर गया है.
मुस्लिम-यादव वोटों में भी मिली बढ़त
राजद का सबसे मजबूत आधार मुस्लिम-यादव यानी एमवाई वोट बैंक माना जाता है. इस उपचुनाव में राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता शुरुआती राउंड से ही पीछे रहीं. कई इलाकों में प्रशांत किशोर को ऐसे बूथों पर भी अच्छी बढ़त मिली, जहां पहले राजद का प्रभाव माना जाता था. इससे कहा जा सकता है कि जन सुराज ने मुस्लिम और यादव वोटरों के बीच भी अपनी पकड़ बनाई.
जाति से आगे बढ़ने की कोशिश
प्रशांत किशोर ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान खुद को किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और बेहतर शासन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. यही वजह रही कि उन्हें अलग-अलग समाज के लोगों का समर्थन मिलता दिखाई दिया.
भाजपा और राजद दोनों के लिए बड़ा संदेश
बांकीपुर का चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं माना जा रहा था. भाजपा के लिए यह अपना गढ़ बचाने की चुनौती थी, जबकि राजद अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती थी. जन सुराज के प्रदर्शन ने दोनों दलों को यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में अब नया विकल्प भी तेजी से जगह बना रहा है.
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भविष्य की राजनीति पर पड़ेगा असर
अगर अंतिम नतीजों में भी यही तस्वीर बनी रहती है, तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर पड़ सकता है. भाजपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक को और मजबूत करना होगा, जबकि राजद को अपने आधार वोटरों को फिर से एकजुट रखने की चुनौती होगी. दूसरी ओर जन सुराज इस प्रदर्शन के दम पर खुद को बिहार की बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी.
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