Sawan 2026 : देवों के देव महादेव की उपासना का पावन महीना इस वर्ष 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त को समाप्त होगा. पूरे 30 दिनों तक चलने वाले इस सावन मास की शुरुआत आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र के शुभ संयोग में होगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रवण नक्षत्र पाप, कष्ट और नकारात्मक प्रभावों का नाश करने वाला माना जाता है. ऐसे शुभ योग में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
जानिए कब पड़ेंगे सावन के चार सोमवार
इस वर्ष सावन में शिवभक्तों को चार सोमवार का व्रत रखने का अवसर मिलेगा. पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को पड़ेगा. इन चारों सोमवार को शिवालयों में सुबह से देर रात तक जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा के लिए मंदिरों में पहुंचेंगे.
23 साल बाद नागपंचमी और सोमवार का दुर्लभ योग
ज्योतिषाचार्य आचार्य भावेश चौबे के अनुसार इस बार सावन का सबसे विशेष संयोग तीसरे सोमवार को बन रहा है. 17 अगस्त को नागपंचमी और सावन सोमवार एक साथ पड़ रहे हैं. ऐसा दुर्लभ संयोग पूरे 23 वर्षों बाद बन रहा है. इससे पहले वर्ष 2003 में नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ी थी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और नागदेवता की संयुक्त पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और कालसर्प दोष सहित कई प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है.
शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में
सावन के स्वागत को लेकर जिलेभर के शिव मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं. पंजवारा, सदर अस्पताल स्थित शिव मंदिर सहित शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख शिवालयों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और आकर्षक सजावट की जा रही है. मंदिर समितियां जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन, शिव सहस्रनाम पाठ और भजन-कीर्तन की विशेष व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं.
ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा प्रभावी
श्रावण मास के दौरान 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा 27-28 अगस्त की रात आंशिक चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है. हालांकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार ये दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. इसलिए देश में इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सावन के सभी धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-पाठ सामान्य रूप से संपन्न होंगे.
रक्षाबंधन के साथ होगा सावन का समापन
सावन मास का समापन 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म के साथ होगा. इसी दिन महीनेभर चली भगवान भोलेनाथ की विशेष आराधना का समापन होगा. शिवभक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, पारिवारिक स्नेह और धार्मिक आस्था का विशेष संगम लेकर आएगा.
