Government Support Demand : बांका जिले के कटोरिया प्रखंड का 10 वर्षीय सुमन कुमार माता-पिता दोनों के निधन के बाद पूरी तरह अनाथ हो गया है. सामाजिक कार्यकर्ता कमलाकांत कुमार ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को आवेदन देकर परवरिश योजना, मिशन वात्सल्य और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बच्चे को आर्थिक सहायता, संरक्षण और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
एक साल की उम्र में पिता का निधन, अब मां का भी उठ गया साया
कटोरिया प्रखंड की भोरसार-भेलवा पंचायत अंतर्गत तसरिया गांव निवासी 10 वर्षीय सुमन कुमार की जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही है. आवेदन के अनुसार, जब सुमन करीब एक वर्ष का था, तभी उसके पिता स्व. दुलार यादव का निधन हो गया था. इसके बाद उसकी मां लता देवी उसे लेकर मनियां पंचायत के लालमटिया गांव स्थित अपने मायके में रहकर उसका पालन-पोषण कर रही थीं.
लेकिन 14 जुलाई 2026 को लता देवी का भी निधन हो गया. मां की मौत के साथ ही सुमन के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया और वह पूरी तरह अनाथ हो गया.
सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
सामाजिक कार्यकर्ता कमलाकांत कुमार ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, बांका को आवेदन देकर बच्चे को तत्काल सरकारी संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है. आवेदन में कहा गया है कि सुमन की वर्तमान स्थिति का सर्वे कराया जाए और उसे सरकार की विभिन्न बाल कल्याण योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके.
पढ़ाई और पालन-पोषण सबसे बड़ी चुनौती
वर्तमान में परिजन बच्चे की देखभाल करने को तैयार हैं, लेकिन उसकी शिक्षा, पालन-पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं होगा. ऐसे में आर्थिक सहायता नहीं मिलने पर उसकी पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है. इसी कारण प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप करने की अपील की गई है.
परवरिश योजना और मिशन वात्सल्य से जोड़ने की मांग
आवेदन में सुमन कुमार को परवरिश योजना, मिशन वात्सल्य की स्पॉन्सरशिप सहायता तथा अन्य उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आग्रह किया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि इन योजनाओं के माध्यम से बच्चे को आर्थिक सहायता, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है, जिससे वह सामान्य जीवन जी सकेगा.
स्थानीय लोगों ने भी त्वरित कार्रवाई की उठाई मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सुमन जैसे अनाथ बच्चों के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. उनका मानना है कि यदि समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध करा दी जाए तो बच्चे की शिक्षा और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकते हैं. अब पूरे क्षेत्र की निगाहें जिला बाल संरक्षण इकाई और जिला प्रशासन की पहल पर टिकी हैं.
