बांका से नवनीत कुमार की रिपोर्ट:
महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी पहल की है. पहले जहां एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) से बचाव के लिए दो डोज वाला टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था, वहीं अब सरकार ने इसे और आसान बनाते हुए सिंगल डोज व्यवस्था लागू कर दी है. 28 फरवरी 2026 से जिले में गार्डासिल नामक नयी वैक्सीन के साथ यह अभियान शुरू किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने अगले 90 दिनों के भीतर 23,151 किशोरियों को एचपीवी रोधी टीका देने का लक्ष्य रखा है. हालांकि, यह राहत की बात यह है कि अभियान शुरू होने के बाद अब तक 11,975 बालिकाओं को टीका लगाया जा चुका है. यह रिपोर्ट तीन दिन पूर्व की है. विभाग की मानें तो करीब-करीब 55 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है. विभाग को उम्मीद है कि सिंगल डोज व्यवस्था लागू होने से पहले की तुलना में अब अधिक संख्या में किशोरियां टीकाकरण से जुड़ेंगी. इससे पहले फरवरी 2025 में शुरू हुए अभियान के तहत नौ से 14 वर्ष की बालिकाओं को दो चरणों में सर्वावैक टीका दिया जाता था. पहली डोज के छह माह बाद दूसरी डोज लेना अनिवार्य था. उस दौरान 11,054 किशोरियों को पहला डोज और 3,194 को दूसरा डोज दिया गया था. हालांकि बीच में फैली अफवाहों के कारण दूसरी डोज लेने वाली बच्चियों की संख्या काफी कम रह गयी थी.नयी व्यवस्था से हुआ टीकाकरण हुआ आसान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब नयी व्यवस्था से टिकाकरण आसान होने की उम्मीद है. इस व्यवसथा के तहत उम्र सीमा में बदलाव किया गया है. पहले जहां नौ से 14 वर्ष तक की बालिकाओं को शामिल किया गया था, वहीं अब 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को टीकाकरण अभियान में शामिल किया जा रहा है. यह टीकाकरण कार्यक्रम जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी, एचडब्लूसी, सदर अस्पताल व स्कूलों में कैंप लगाकर चलाया जा रहा है.क्या है एचपीवी और क्यों जरूरी है यह टीका
एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है. समय पर टीकाकरण से इस गंभीर बीमारी के खतरे से बचा जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में लिया गया यह टीका भविष्य में महिलाओं को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने में कारगर साबित होता है.कहते हैं सीएस
सिंगल डोज व्यवस्था लागू होने के बाद अब उम्मीद जतायी जा रही है कि जिले में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ यह अभियान और अधिक प्रभावी होगा तथा आने वाले वर्षों में महिलाओं को इस गंभीर बीमारी से बचाने में बड़ी सफलता मिलेगी. सभी अभिभावकों से अपील है कि वे जागरुक होकर अपने बच्चियों का सही उम्र पर टीका जरुर दिलाएं. यह पूरी तरह सुरक्षित और निशुल्क है. सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध है.डाॅ. जितेंद्र सिंह, सीएस, बांका.
