जयपुर (बांका) से लक्ष्मण कुमार मंटु की रिपोर्ट :
बांका-देवघर मार्ग के भाया जमदाहा-जयपुर सड़क मार्ग पर चांदन नदी के कधार घाट पर स्थित श्रीश्री 108 बाबा घटबैनाथ मंदिर में प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को श्रद्धालुओं द्वारा सैकड़ों की संख्या में पाठा की बलि दी जाती है. फिर बलि के उपरांत पाठा को मंदिर के आसपास के जगहों पर ही लोग प्रसाद के रूप में तैयार कर ग्रहण करते हैं.दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
यहां बिहार के अलावे झारखंड व बंगाल के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु पूजा-अर्चना व बलि के लिए पहुंचते हैं. इस मंदिर में सावन मास, छठ पूजा और नवरात्रि में बलि प्रथा पर रोक रहती है. पूजा-अर्चना में सिर्फ नैवेद्य का भोग लगाया जाता है. मंदिर कमिटी के सचिव नुनदेव यादव ने बताया कि कधार बजार स्थित दुर्गा व काली मंदिर से घटबैनाथ मंदिर का जुड़ाव है.मंदिर कमिटी कर रहा विमर्श
कधार में गंवाली पूजा के मौके पर इस बार सोमवार के बदले मंगलवार को घटबैनाथ मंदिर में बलि दी जाएगी. बलि के उपरांत पाठा को श्रद्धालुओं द्वारा घर ले जाने की अनुमति देने पर भी पूजा कमिटी में विचार-विमर्श चल रहा है.
