राधा किशोरी जी ने बताया मानव जीवन में साधना व संस्कारों का महत्व
वामन अवतार व श्रीराम कथा के वर्णन से भक्तिमय हुआ गोकुला गांव
बौंसी. प्रखंड क्षेत्र के गोकुला गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा इन दिनों भक्ति व आस्था का केंद्र बना हुआ है. गोकुलावासियों, आचार्य यजमानों व क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति में विधिवत भागवत पूजन, आरती, मंगलाचरण व वेदोक्त श्लोकों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जा रहा है. कथाव्यास राधा किशोरी जी महाराज ने कथा के दौरान भगवान नाम संकीर्तन से वातावरण को भक्तिमय बना दिया. उन्होंने गजेंद्र मोक्ष का प्रसिद्ध प्रसंग अत्यंत भावनात्मक और सरस शैली में प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. कथा के क्रम में समुद्र मंथन का भी विस्तृत वर्णन किया गया. दीदी ने बताया कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से 14 रत्न प्राप्त हुए, उसी प्रकार मानव जीवन भी एक समुद्र है, जिसमें साधना, गुरु कृपा, गोविंद कृपा, अच्छे संस्कार और भक्ति भाव के माध्यम से हर व्यक्ति अपने जीवन में अनमोल रत्न प्राप्त कर सकता है. इसके साथ ही 52 अवतारों की मधुर कथा सुनाते हुए राजा बलि के प्रसंग को विस्तार से बताया गया. उन्होंने कहा कि दैत्य कुल में जन्म लेने के बावजूद अपने श्रेष्ठ संस्कार, गुरु सेवा और गौ सेवा के बल पर बलि राजा तीनों लोकों के स्वामी बने, जिससे प्रसन्न होकर भगवान को वामन अवतार लेकर उनके द्वार पर आना पड़ा. दीदी ने श्रीराम कथा का भी संक्षिप्त और प्रेरणादायक वर्णन करते हुए बताया कि भागवत का वास्तविक रहस्य समझने के लिए भगवान राम की मर्यादा को जानना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि रामायण हमें सदा धर्म के मार्ग पर चलना और श्रेष्ठ आचरण अपनाना सिखाती है. कथा के चौथे दिन भगवान बाल गोपाल के जन्म का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया. भगवान बांके बिहारी की बधाई और सोहर गीतों ने पूरे पंडाल को भक्ति रस में डुबो दिया. भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और कई भक्त नाचने के लिए विवश हो गए. यह भव्य आयोजन श्याम रसदार रोटी सेवा संस्थान के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है. पूरा गोकुला गांव इन दिनों भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है.
