अमरपुर (बांका). प्रखंड क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन मानी जाने वाली बड़ी बांध लंबे समय से क्षतिग्रस्त है. बांध में पर्याप्त पानी का भंडारण नहीं होने के कारण नहर के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया है. ऐसे में किसान खरीफ फसल की सिंचाई के लिए निजी डीजल पंप और अन्य साधनों पर निर्भर हैं. किसानों का कहना है कि बांध की मरम्मत में देरी का सीधा असर उनकी खेती और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है.
भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ था बांध
ग्रामीणों के अनुसार अगस्त 2025 में हुई भारी बारिश के दौरान बड़ी बांध क्षतिग्रस्त हो गया था. बांध के क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही किसान इसके मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं. करीब पांच-छह माह पहले लघु जल संसाधन विभाग, पटना की टीम ने बड़ी बांध का निरीक्षण भी किया था. विभागीय टीम के निरीक्षण के बाद किसानों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा, लेकिन अब तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है.
डीजल पंप से पटवन करने को मजबूर किसान
बांध में पानी का पर्याप्त भंडारण नहीं होने के कारण नहर के जरिए खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया है. इसके चलते किसान निजी डीजल पंप के माध्यम से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमत और पटवन पर होने वाले अन्य खर्च के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. बड़ी बांध की मरम्मत होने पर नहर के जरिए सिंचाई सुविधा बहाल हो सकती है और किसानों को निजी पंप पर निर्भरता से राहत मिल सकती है.
चार पंचायतों समेत शाहकुंड के किसानों को मिलता है लाभ
बड़ी बांध से अमरपुर प्रखंड की महादेवपुर, गरीबपुर, भिखनपुर और पवई पंचायत समेत भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की हजारों एकड़ खेती योग्य भूमि की सिंचाई होती रही है.
बांध की मौजूदा स्थिति का असर केवल अमरपुर के किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के बड़े कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है. किसानों के अनुसार समय पर बांध की मरम्मत नहीं होने से सिंचाई की पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो गई है.
रबी फसल को लेकर अभी से चिंता
किसान रणधीर राय ने कहा कि बड़ी बांध क्षेत्र के किसानों के लिए महज जल संरचना नहीं, बल्कि खेती की जीवनरेखा है. बांध के क्षतिग्रस्त रहने से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि खरीफ फसल की सिंचाई में किसानों को परेशानी हो ही रही है, अब रबी फसल के समय पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बनी हुई है. विभाग को निर्माण कार्य में तेजी लाकर बांध को जल्द चालू कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए.
टेंडर के बाद शुरू होगा निर्माण
किसानों ने मांग की है कि विभागीय स्तर पर प्राक्कलन तैयार होने के बाद अब टेंडर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए. उनका कहना है कि समय पर बांध की मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले फसल चक्र में सिंचाई की समस्या और गंभीर हो सकती है.
कहते हैं विभागीय अधिकारी
लघु जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता अशोक सिंह ने बताया कि बड़ी बांध के निर्माण कार्य का प्राक्कलन तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही बड़ी बांध का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा.
