Special Lok Adalat: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) बांका सत्य भूषण आर्य के निर्देश पर शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव कार्यालय में सभी न्यायिक दंडाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई. बैठक का मुख्य उद्देश्य 18 जुलाई को व्यवहार न्यायालय, बांका में आयोजित होने वाली स्पेशल लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा करना था.
लंबित मामलों के पक्षकारों को भेजे जाएंगे नोटिस
डीएलएसए सचिव सपना रानी ने सभी न्यायिक दंडाधिकारियों को निर्देश दिया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) से संबंधित लंबित वादों की पहचान कर संबंधित पक्षकारों को समय पर नोटिस तामिला कराया जाए. साथ ही उन्हें 18 जुलाई को न्यायालय में उपस्थित होकर आपसी सुलह-समझौते के आधार पर अपने मामलों का निपटारा कराने के लिए प्रेरित किया जाए.
सुलह-समझौते से होगा त्वरित निपटारा
सपना रानी ने कहा कि स्पेशल लोक अदालत का उद्देश्य चेक बाउंस से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान करना है. इससे पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी. उन्होंने सभी न्यायिक अधिकारियों से इस अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य करने का आग्रह किया.
बैठक में मौजूद रहे न्यायिक पदाधिकारी
बैठक में न्यायिक पदाधिकारी मोहम्मद शाहनवाज आलम, अविनाश कुमार, संगीता कुमारी, भवेश चंद्र, नवनीत कुमार सहित अन्य न्यायिक दंडाधिकारी उपस्थित रहे. सभी अधिकारियों ने स्पेशल लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा की.
क्या है एनआई एक्ट, 1881?
डीएलएसए सचिव ने बताया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act) भारत का महत्वपूर्ण कानून है, जो वचन-पत्र, विनिमय-पत्र और चेक जैसे वित्तीय दस्तावेजों से जुड़े लेन-देन को नियंत्रित करता है. इसी कानून के तहत चेक बाउंस जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. स्पेशल लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित और प्रभावी निपटारा किया जाएगा.
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