पंजवारा (बांका). बिहार झारखंड बॉर्डर स्थित बांका जिला के धौरैया प्रखंड अंतर्गत पैर पंचायत के पैर पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां प्रत्येक सोमवार को दूर-दराज के अलावा बिहार झारखंड स्थित कई गांव के शिव भक्त पहुंचते हैं. यह लता व वृक्षों से बीच पहाड़ी के दृश्य पर यशवरना के नाम से प्रसिद्ध शिवपुरी शिव मंदिर अवस्थित है. इस मंदिर की महिमा अपरंपार है मंदिर के पुजारी प्रेम कुंदन बिहारी ने बताया कि सावन माह के अलावा शिवरात्रि के मौके पर यहां काफी दूरदराज से लोग आकर अपनी मन्नतें मांगने के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक व पूजा अर्चना करते हैं. शिवरात एवं सावन माह के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है. उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी के रूप में यह हमारी सातवीं पीढ़ी है. पहले मंदिर के पुजारी स्वर्गीय लाली बाबा उर्फ चेतन आनंद शास्त्री हुआ करते थे. उनके अथक प्रयास से पहाड़ के चारों ओर फैली हरियाली जिसमें सैकड़ों बेल, कंद मुल और माधवी लता सहित कई फलदार फल व वृक्ष हैं. सन 1980 से यहां लाली बाबा इस अभियान से जुड़े हुए हैं और यहां के ग्रामीण भी इनको पूरा सहयोग देते हैं, जो इस मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देती है. है.
मंदिर का इतिहास है कई सदी पुराना
पुजारी प्रेम कुंदन बिहार ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास कई सदी पुराना है. मंदिर के चौखट आदि पर पत्थर के निर्माण के प्रमाण अभी भी मौजूद है. पैर पहाड़ी के नाम पर किंबदंती का प्रसंग सुनाते हुए बताते हैं कि समुद्र मंथन काल में जब भगवान शंकर विषपान कर चले तो पहला कदम इसी पहाड़ी पर पड़ा. तभी से यह पहाड़ के नाम से प्रसिद्ध हो गया. यह पहाड़ की हरियाली आने वाले भक्तों को थकान दूर कर देती है. बाबा ने बताया कि यह पहाड़ पर मंदिर को रजौन के तत्कालीन जमींदार वायु मंडल ने 7.5 बीघा भूमि दान दे दिया था. झारखंड की सीमा से सटे रहने के कारण भोलेनाथ के दरबार में 2 राज्यों की दीवारें भी मिट जाती हैं. श्रद्धालु इसके मनोरम दृश्य को देखकर मन मुक्त हो जाता है. पूजा के लिए आये श्रद्धालु इस मनोरम वादी में घूम कर अपनी थकान दूर कर लेते हैं. यह मंदिर प्रखंड क्षेत्र के लोगों के लिए एक रमणीक स्थान बन गया है. इस पहाड़ की ऊंचाई 200 से 250 फीट है, जहां पर शिव मंदिर होने के कारण इसे यहां के लोग मीनी कैलाश पर्वत कहते हैं.
