औरंगाबाद: सावन में उमगा के गौरी शंकर मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं शिव-पार्वती, जानिए मंदिर का महत्व...

ऐतिहासिक उमगा पहाड़ का गौरी शंकर मंदिर सावन माह में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह सिद्धपीठ प्राकृतिक गुफा में विराजमान शिव-पार्वती की दिव्य प्रतिमा के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि यहां सावन में जलाभिषेक से बारहों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य मिलता है.

Aurangabad Gauri Shankar Mandir: जिले के मदनपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक उमगा पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर अवस्थित गौरी शंकर मंदिर सावन माह में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. सैकड़ों वर्ष पुराने इस प्राकृतिक गुफा मंदिर को सिद्धपीठ का दर्जा प्राप्त है. पूरे सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं. मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या भी उल्लेखनीय रहती है.

सावन में विशेष रूप से सजाया जाता है मंदिर परिसर

मंदिर के पुजारी के अनुसार, सावन माह में मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है. हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था भी की जाती है.

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखती है उमगा पहाड़ी

ग्रेनाइट चट्टानों से बनी उमगा पहाड़ी धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है. यहां आज भी प्राचीन मंदिरों के भग्नावशेष मौजूद हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं. यही वजह है कि उमगा पहाड़ी को धार्मिक नगरी के रूप में भी पहचान मिली है.

हिंदी पंचांग के अनुसार यहां वर्षभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है. सूर्य जन्मोत्सव, कार्तिक और चैत्र मास के छठ पर्व पर सूर्य मंदिर, माघ मास की बसंत पंचमी, षष्ठी एवं सप्तमी पर उमंगेश्वरी प्राकृतिक मंदिर तथा पूरे सावन माह में गौरी शंकर प्राकृतिक गुफा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं.

प्राकृतिक चट्टान से बनी है शिव-पार्वती की प्रतिमा

राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पहाड़ी की दूसरी श्रृंखला की ऊंचाई पर यह गुफा मंदिर स्थित है. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान शिव और माता पार्वती की दिव्य प्रतिमा है. करीब तीन फीट ऊंची यह प्रतिमा उमगा पहाड़ी की प्राकृतिक चट्टान से ही निर्मित बतायी जाती है और इसमें शिव-पार्वती की प्रणय मुद्रा दिखाई देती है.

बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान पुण्य की मान्यता

स्थानीय मान्यता के अनुसार, सावन माह में ब्रह्ममुहूर्त में इस गुफा मंदिर में दर्शन, पूजा और जलाभिषेक करने से बारहों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. इसी धार्मिक विश्वास के कारण हर वर्ष सावन में यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर मनोकामना मांगते हैं.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विनय सिंह

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >