पुनपुन नदी के चनहट घाट पर हुआ पितरों का तर्पण

तर्पण से पितरों का मिलेगी मोक्ष

हसपुरा. सोमवार को पितृपक्ष आरंभ होते ही हसपुरा थाना क्षेत्र के पुनपुन नदी सूर्य घाट चनहट में सनातनियों ने देव ऋषि पितरों का तर्पण आरंभ किया है. गुरुदेव आचार्य पंडित लालमोहन शास्त्री ने सभी को परंपरागत तर्पण कराया. उन्होंने पुनपुन नदी चनहट घाट पर पितरों के नाम तर्पण करने का महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मगध क्षेत्र के दो तीर्थ पितरों को समर्पित है. प्रथम गयाजी धाम और दूसरा आदिगंगा पुनपुन नदी. गयाजी श्राद्ध करने से पहले पुनपुन में स्नान तर्पण और पिंडदान किया जाता है. ब्रह्मा के कमंडल से बारबार छलका वामन भगवान का चरणोदक पुनपुन नदी है. पितृपक्ष आरंभ होते ही पितर पुनपुन नदी तट पर आ जाते है. अमावस्या के दिन घर के द्वार पर आते है. यदि पुत्र पौत्र नाती जलदान नहीं करता है तो नारुष्ट होकर चले जाते हैं. नाना प्रकार के कष्टों का सामना पुत्रादि को करना पड़ता है. 15 दिन तक तर्पण नहीं कर सकते, तो एक दिन पिता की पुण्यतिथि पर जरूर करें. यदि पिता की मृत्यु तिथि याद नहीं हो अमावस्या के दिन तर्पण जरूर करें. गयाजी श्राद्ध करने के बाद भी प्रत्येक वर्ष तर्पण करना चाहिए. पितरों का मोक्ष को लेकर मुन्ना पांडेय, अरविंद तिवारी, अमरेश पांडेय, सुनील शर्मा, शुभाष शर्मा आदि ने तर्पण किये.

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By SUJIT KUMAR

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