चार लेबर कोड वापस लेने और स्कीम वर्कर्स को स्थायी दर्जा देने की मांग
औरंगाबाद कार्यालय
.देश के ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में गुरुवार को कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. भाकपा माले, किसान महासभा, खेत मजदूर सभा, निर्माण मजदूर यूनियन, आशा, आंगनबाड़ी संघ सहित सभी मजदूर यूनियनों के सैकड़ों कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए. प्रदर्शनकारी शहर के गांधी मैदान से मुख्य बाजार होते हुए समाहरणालय पहुंचे और आवाज बुलंद की. रमेश चौक पर मांगों के समर्थन में जोरदार हल्ला बोला गया. प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा माले के जिला सचिव मुनारिक राम, खेत मजदूर सभा के जिला सचिव चंद्रमा पासवान, किसान महासभा के जिला सचिव कामता यादव, निर्माण मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष बिरजू चौधरी, जिला सचिव अवधेश गिरी, आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष बसंती देवी, जिला मंत्री प्रमिला देवी, जिला सचिव देवाली सिंह, मुन्नी देवी, पुष्पा देवी, महिला संगठन एपवा की जिलाध्यक्ष रिंकू देवी और मीना सिंह कर रहे थे. रमेश चौक पर प्रदर्शन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि देश की आजादी के बाद लंबी लड़ाई के बाद मजदूरों के हित में 29 श्रम कानून बनाये गये थे, जिसे केंद्र सरकार ने निरस्त कर चार श्रम कानूनों में तब्दील कर दिया. नेताओं ने कहा कि इन कानूनों के प्रावधान मजदूर विरोधी हैं और मजदूरों को गुलाम बनाने वाले हैं, इसलिए इन्हें तत्काल वापस लिया जाये. इस मौके पर नौजवान सभा के नेता गुड्डू चंद्रवंशी, आइसा के जोगेंद्र कुमार, कर्मचारी नेता राम विजय यादव, माले नेता कमलदेव पासवान, सीपीइ जिला सचिव रामचंद्र यादव, सुरेश यादव, माले के प्रखंड सचिव कैलाश पासवान, देव प्रखंड सचिव सुनील यादव, नरेश मेहता, करमू पासवान, राजकुमार भगत, अमिलौना पंचायत के मुखिया सह माले प्रखंड सचिव दिनेश राम, गोह प्रखंड सचिव देवरुल पासवान, हसपुरा प्रखंड सचिव दिनेश राम और अशोक यादव आदि मौजूद थे.क्या हैं प्रमुख मांगेंमजदूर विरोधी चार लेबर कोड वापस लिया जाये.सभी स्कीम वर्कर्स आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाये.
प्रत्येक माह मानदेय भुगतान की गारंटी की जाये.पोषाहार सामग्री की दर बाजार मूल्य के हिसाब से निर्धारित की जाये.सरकारी जमीन पर बसे गरीबों को उजाड़ने के बजाय पर्चा दिया जाये.किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीद की गारंटी दी जाये.
