Aurangabad News: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और पुण्यदायी समय माना जाता है. मान्यता है कि इस पूरे माह श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और गन्ने का रस अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि सावन शुरू होते ही देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठता है.
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश पाठक के अनुसार, इस वर्ष सावन 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा. उदया तिथि के आधार पर 30 जुलाई (गुरुवार) से सावन मास का शुभारंभ माना जाएगा. इस दौरान चार सावन सोमवार, सावन शिवरात्रि, हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे.
सावन सोमवार और प्रमुख पर्वों की तिथियां
सावन सोमवार:
- पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त
- दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त
- तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त
- चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त
प्रमुख पर्व:
- सावन शिवरात्रि: 11 अगस्त
- हरियाली तीज: 15 अगस्त
- नाग पंचमी: 17 अगस्त
- रक्षाबंधन व श्रावण पूर्णिमा: 28 अगस्त
ग्रहण का संयोग, पर भारत में नहीं दिखेगा असर
पंडित सतीश पाठक ने बताया कि इस दौरान 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण का संयोग रहेगा. हालांकि, दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. इसलिए इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन सहित किसी भी धार्मिक अनुष्ठान पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है सावन
शिव पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में श्रावण मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है. पंडित सतीश पाठक बताते हैं कि इस माह भगवान शिव का जलाभिषेक, व्रत, जप, दान और पूजा-अर्चना करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है. विशेष रूप से सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करने का अत्यंत शुभ फल मिलता है.
