औरंगाबाद में होटलों का कचरा और अतिक्रमण बना काल, घुट-घुट कर दम तोड़ रही पुनपुन नदी; ‘स्वच्छ नदी’ योजना फेल!

Punpun River Aurangabad News: औरंगाबाद के नवीनगर में पुनपुन नदी में होटलों का कचरा, गंदा पानी और अतिक्रमण से प्रदूषण बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों ने नदी बचाने के लिए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की.

Punpun River Aurangabad News: (सौरभ कुमार सिंह) बिहार की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल पुनपुन नदी आज मानवीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. औरंगाबाद जिले के नवीनगर बाजार में नदी की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. कभी स्वच्छ जलधारा के रूप में पहचान रखने वाली पुनपुन नदी अब कचरे, प्लास्टिक और गंदगी का ढेर बनती जा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी को खुलेआम डस्टबिन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं.

होटलों का कचरा और गंदा पानी सीधे नदी में

स्थानीय लोगों के अनुसार नवीनगर बाजार के कई होटल, ढाबे और खाद्य प्रतिष्ठान बचा हुआ भोजन, प्लास्टिक, पॉलिथीन और गंदा पानी बिना किसी उपचार के सीधे पुनपुन नदी में बहा रहे हैं. नदी किनारे जगह-जगह कचरे के ढेर जमा हो गए हैं, जिससे दुर्गंध फैल रही है और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है.

शहर की गंदगी का बना ठिकाना

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल होटल ही नहीं, बल्कि बाजार का घरेलू कचरा और नालों का गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है. कई स्थानों पर सफाई के दौरान निकला कचरा भी नदी किनारे फेंक दिया जाता है. इससे नदी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है और उसका प्राकृतिक स्वरूप लगातार समाप्त होता जा रहा है.

अतिक्रमण से सिकुड़ रही पुनपुन नदी

नदी के दोनों किनारों पर लगातार अवैध निर्माण और अतिक्रमण बढ़ रहा है. इससे नदी की चौड़ाई कम होती जा रही है. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में जल प्रवाह बाधित होगा और बाढ़ जैसी समस्याएं भी गंभीर रूप ले सकती हैं.

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी खतरे में

पुनपुन नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर भी है. गया में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण सहित कई धार्मिक अनुष्ठानों में इस नदी के जल का विशेष महत्व माना जाता है. इसके अलावा यह नदी किसानों के लिए सिंचाई और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति का भी महत्वपूर्ण स्रोत है.

सरकारी योजनाओं पर उठ रहे सवाल

केंद्र और राज्य सरकार की ‘नमामि गंगे’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘स्वच्छ नदी’ जैसी योजनाओं के बावजूद नवीनगर में पुनपुन नदी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. न तो ठोस कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था दिखाई देती है और न ही प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती नजर आ रही है.

लोगों ने की ठोस कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नगर पंचायत एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि नदी में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. होटलों के अपशिष्ट निस्तारण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए.

अशोक सिंह, सुरेंद्र सिंह, अभय गुप्ता, रामविलाश प्रसाद, मधुसूदन कुमार और अजय शर्मा सहित कई लोगों ने कहा कि जिस गंभीरता से जिला प्रशासन विकास योजनाओं को लागू कर रहा है, उसी प्रतिबद्धता के साथ पुनपुन नदी के संरक्षण के लिए भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है. उनका कहना है कि यदि आज नदी को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण केवल एक सपना बनकर रह जाएगा.

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By Vivek Ranjan

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