Aurangabad News : ओबरा प्रखंड के रतवार गांव निवासी किसान एवं ओबरा कृषि कार्यालय के पूर्व आत्मा अध्यक्ष रामाधार मेहता इन दिनों औषधीय फसल शतावर के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं. वे साइकिल के माध्यम से गांव-गांव और ओबरा बाजार में घूमकर लोगों को शतावर की खेती और इसके औषधीय लाभों के प्रति जागरूक कर रहे हैं.
2022 में शुरू की थी शतावर की खेती
रामाधार मेहता ने बताया कि वर्ष 2022 में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से शतावर के पौधे लाकर अपनी गृह वाटिका में इसकी खेती शुरू की थी. उन्होंने कहा कि शतावर की जड़ औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इसका उपयोग महिलाओं में स्तनपान के दौरान दूध की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए भी लाभकारी माना जाता है.
ओबरा में पहली बार हो रही शतावर की खेती
उन्होंने बताया कि ओबरा प्रखंड में पहली बार शतावर की खेती की जा रही है. कम लागत में अधिक लाभ देने वाली यह औषधीय फसल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को ध्यान में रखते हुए वे इस खेती को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं.
प्रोत्साहन राशि नहीं, फिर भी कर रहे खेती
राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किसान रामाधार मेहता ने कहा कि सरकार की ओर से औषधीय फसलों की खेती के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती है. इसके बावजूद वे अपने स्तर पर कई औषधीय फसलों की खेती कर अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं.
किसानों से की औषधीय खेती अपनाने की अपील
रामाधार मेहता ने किसानों से शतावर जैसी औषधीय फसलों की खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार समय की आवश्यकता है. वर्तमान में वे ओबरा मुख्य बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में साइकिल से घूम-घूमकर लोगों को औषधीय खेती के फायदे बता रहे हैं और किसानों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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