औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड परिसर स्थित ई-किसान भवन में सोमवार को नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजन किया गया. बीएओ डॉ दीपक कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक मुक्त खेती के प्रति जागरूक कर प्राकृतिक खेती से जोड़ना है. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांत, महत्व और लाभों के बारे में विस्तार से बताया.
कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है और लागत बढ़ रही है. वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और मानव स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
प्राकृतिक खेती से कम होगी लागत, सुधरेगी मिट्टी की सेहत
केवीके, सिरीस के मास्टर ट्रेनर लवकांत सिन्हा ने किसानों को प्रायोगिक तौर पर बीजामृत और जीवामृत बनाना सिखाया. उन्होंने बताया कि बीजामृत से बीज उपचार करने पर बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण क्षमता बढ़ती है.
वहीं जीवामृत के प्रयोग से भूमि में लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है, जिससे फसल को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है. इसके लिए प्रखंड के जगदीशपुर पंचायत के 125 किसानो का एक समूह बनाया गया है. समूह में शामिल किसान क्षेत्र में भ्रमण कर किसानो को जैविक खेती के लिए प्रेरित करेगे.
किसानों ने सीखे बीजामृत और जीवामृत बनाने के गुर
कार्यक्रम में बीएओ जैविक रौशन कुमार, बीटीएम अंजय कुमार, प्रगतिशील किसान ब्रजकिशोर मेहता, कृषि सखी आशा कुमारी और सोनी कुमारी समेत बड़ी संख्या में चयनित किसान शामिल हुए. किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया.
किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने का लिया संकल्प
ज्ञात हो कि सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रशिक्षित कर उन्हे जागरूक किया जा रहा है. इसके बावजूद कृषक वर्ग असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव करने से परहेज नही कर रहे हैं. ऐसे में फसल में कीट-व्याधि और रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है.
फसल में कीट-व्याधि और रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है
इस दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि वे पारंपरिक खेती की पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं. कार्यक्रम के अंत में सभी ने जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही.
