अपात्रों के नाम हटेंगे, पात्रों को मिलेगा मतदान का अधिकार

जिले में 22 साल बाद शुरू हुआ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण

जिले में 22 साल बाद शुरू हुआ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षणप्रतिनिधि, औरंगाबाद शहर.

जिले में 22 वर्षों बाद मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण प्रारंभ हो गया है. इस प्रक्रिया के अंतर्गत जहां अपात्र व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से विलोपित किये जायेंगे, वहीं सभी पात्र लोगों के नाम जोड़कर उन्हें मतदान का अधिकार प्रदान किया जायेगा. इस संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने की. बैठक में सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे. बैठक का उद्देश्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के आलोक में विधानसभा निर्वाचन के दृष्टिगत विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों की समीक्षा करना व आवश्यक निर्देश देना था. डीएम ने स्पष्ट किया कि इस पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल हों, जबकि अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जाये. मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता व समावेशिता सुनिश्चित करना स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है. उन्होंने बताया कि बिहार में पिछली बार व्यापक स्तर पर गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था. इस दृष्टि से यह पुनरीक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.

मतदान केंद्रों का होगा युक्तिकरण

बैठक में बताया गया कि मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 1200 मतदाताओं के औसत के आधार पर किया जायेगा. मतदान केंद्रों की प्रारंभिक सूची 30 जून 2025 को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सौंपी जायेगी, ताकि समय रहते सुझाव व आपत्तियों पर विचार किया जा सके. सभी राजनीतिक दलों से अपील की गयी कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की नियुक्ति करें, ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया में जन सहभागिता सुनिश्चित की जा सके. बीएलए त्रुटियों और विसंगतियों की प्रारंभिक पहचान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे.

बीएलओ घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन

पुनरीक्षण के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करेंगे. वे पहले से मुद्रित एन्यूमरेशन फॉर्म की दो प्रतियां मतदाताओं को वितरित करेंगे और भरने में सहायता भी करेंगे. इच्छुक मतदाता इस फॉर्म को ऑनलाइन डाउनलोड कर, आवश्यक दस्तावेजों सहित डिजिटल माध्यम से भी जमा कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन करने वालों के दस्तावेजों का सत्यापन भी बीएलओ द्वारा घर जाकर किया जायेगा. बीएलओ प्राप्त फॉर्म और संलग्न प्रमाणपत्रों को बीएल या इसीआइ नेट मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड करेंगे.

वंचित वर्गों को प्राथमिकता

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि वृद्ध, दिव्यांग, बीमार, निर्धन और अन्य वंचित वर्गों के मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाये. आवश्यकता पड़ने पर उनकी सहायता के लिए स्वयंसेवकों की नियुक्ति भी की जा सकती है.

1987 से पहले और 2004 के बाद में जन्मे लोगों को देने होंगे जरूरी दस्तावेज

निर्वाचक पंजीकरण की पात्रता के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है कि एक जुलाई 1987 से पहले जन्म वालों को केवल अपनी जन्म तिथि या जन्म स्थान से संबंधित दस्तावेज की स्व-प्रमाणित प्रति देनी होगी. एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्म वालों को स्वयं या माता-पिता में से किसी एक का वैध दस्तावेज देना अनिवार्य होगा. दो दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वालों को स्वयं के साथ-साथ माता व पिता दोनों से संबंधित दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियां देनी होंगी. यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो उनके वैध पासपोर्ट व वीजा की प्रमाणित प्रतियों को भी आवेदन के साथ संलग्न करना आवश्यक होगा. यदि कोई निर्वाचक 2003 की मतदाता सूची में शामिल नहीं था, तो उसे भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वैध दस्तावेजों में से किसी एक का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा. प्रत्येक मतदाता को एन्यूमरेशन फॉर्म के साथ मतदाता सूची में अपनी प्रविष्टि की स्व-प्रमाणित छायाप्रति भी बीएलओ को देनी होगी.

समन्वय और निगरानी की सख्त व्यवस्था

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी नियमित रूप से क्षेत्र का पर्यवेक्षण करें और प्रतिदिन प्रखंडवार प्रतिवेदन निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी को दें. निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी इन प्रतिवेदनों की समीक्षा कर समेकित रिपोर्ट जिला निर्वाचन पदाधिकारी को उपलब्ध करायेंगे. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह विशेष गहन पुनरीक्षण 25 जून से प्रारंभ होकर 26 जुलाई तक चलेगा. इसकी अर्हता तिथि 1 जुलाई 2025 निर्धारित की गयी है। इसके उपरांत दावा-आपत्ति, सुधार तथा अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया आगामी तिथियों में संचालित की जायेगी. संपूर्ण पुनरीक्षण कार्यक्रम 30 सितंबर 2025 तक चरणबद्ध रूप से पूरा किया जायेगा.

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By Sujit kumar

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