छह सितंबर को होगी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा

अनुष्ठान को लेकर सनातन धर्मावलंबियों में आस्था

औरंगाबाद/अंबा. सनातन संस्कृति का व्रत अनंत चतुर्दशी धार्मिक वातावरण में छह सितंबर शनिवार को विधि विधान से किया जायेगा. लौकिक व वैदिक परंपरा में अनंत चतुर्दशी का काफी महत्व है. ज्योतिर्विद डॉ हेरम्ब कुमार मिश्र ने बताया कि शुक्रवार की रात 1: 46 बजे से शनिवार की रात एक बजकर तीन मिनट तक चतुर्दशी तिथि होने के कारण इसी दिन उपवास रहकर मध्याह्न (दोपहर) में विधिपूर्वक भगवान की पूजा की जायेगी. पूजन के उपरांत श्रद्धालु अनंत भगवान की कथा का श्रवण कर कच्चे धागे या रेशम सूत्र से चौदह गांठों का निर्मित अनंत अपनी बांह पर धारण करेंगे. इसके लिए सनातन धर्मावलंबी अहले सुबह से उपवास रखकर पूजा की तैयारी में जुटे रहते हैं. पूजा के दौरान प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं को अधिक महत्व दिया जाता है. ज्योतिर्विद ने बताया कि व्रती को चाहिए कि स्नानादि से निवृत्त होकर जल, अच्छत, चंदन, कुमकुम, धूप, नैवेद्य, पंचपल्लव, घी, फल, फूल व पंचामृत और क्षीर सागर समुद्र मंथन के लिए खीरा व यथाशक्ति प्रसाद से भगवान की पूजा करे. डॉ मिश्र ने बताया कि अनंत व्रत विष्णु भगवान के अंनत स्वरूपों के लिए समर्पित होता है. इस दिन विधि विधानपूर्वक पूजा करने से समस्त संकटों का नाश होता है. घर परिवार में सुख, शांति व समृद्धि आती है. पौराणिक मान्यता है कि द्वापर में जब पांडव द्यूतक्रीड़ा में अपना समस्त राज पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने की सलाह दी. धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों एवं द्रौपदी के साथ विधि विधान से अनंत व्रत किया और भगवान के अनंत स्वरूप रूपी अनंत सूत्र को बांह पर धारण किया. पूजन के बाद भक्तिपूर्वक कथा का श्रवण किया जाता है.

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By SUJIT KUMAR

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