शैलपुत्री की पूजन के साथ शुरू हुआ गुप्त नवरात्र, मंत्र सिद्धि का है योग्य

चैत एवं आशीन माह में मनाए जाने वाले नवरात्र के अलावा आषाढ़ एवं माघ महीने में गुप्त नवरात्र मनाया जाता है

अंबा. शैलपुत्री के पूजन के साथ गुरुवार से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हुई. वहीं आज शुक्रवार यानी नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जायेगी. आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार इस नवरात्र में मां दुर्गा की साधना गुप्त रूप से की जाती है. ढूंढा गांव निवासी आचार्य राधे कृष्ण पांडेय उर्फ गुड्डू पांडेय एवं कंचन पांडेय ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्री का त्यौहार मनाया जाता है. चैत एवं आशीन माह में मनाए जाने वाले नवरात्र के अलावा आषाढ़ एवं माघ महीने में गुप्त नवरात्र मनाया जाता है. आषाढ़ महीने में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से हुई है, जो चार जुलाई तक मनाई जाएगी. यह नवरात्रि तांत्रिक और अघोरी समुदाय के लिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य गुप्त सिद्धियां प्राप्त करना व मनोकामनाओं को पूर्ण करना होता है. उन्होंने बताया कि इस दौरान साधक तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक शक्तियों को प्राप्त करने के लिए विशेष साधनाएं करते हैं. कई साधक 10 महाविद्याओं की पूजा भी करते हैं और विभिन्न सिद्धियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. कुछ तांत्रिक लोग अघोर तंत्र साधना करते हैं. 10 महाविद्याओं में काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बंगलामुखी, मातंगी व कमला शामिल हैं. इन साधनाओं के माध्यम से साधक आत्म-बल, सिद्धियां और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त कर सकते हैं. आचार्य ने बताया कि आमतौर पर इस नवरात्र में भी दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य या श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करना और अंतिम दिन हवन करना विशेष रूप से शुभ फलदाई होता है. मां दुर्गा, महाकाली और बगलामुखी के मंदिरों में दर्शन और साधना करने से अद्भुत लाभ मिलता है. कई जगहों पर कलश स्थापित कर साधक गुप्त रूप से मां की उपासना की जाती है. इधर गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होने से अंबा के औरंगाबाद रोड स्थित मां दुर्गा की मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है. श्रद्धालु सच्चे मन से माता की पूजा-अर्चना करने में लगे हुए हैं. आचार्य ने बताया कि यह नवरात्र चार जुलाई यानी शुक्रवार तक रहेगी. इस दौरान लोगों को सुबह स्नान करके पूरी शुद्धता के साथ मां की पूजा करनी चाहिए. मां के नौ रूपों को प्रसन्न करने के लिए हर दिन अलग-अलग भोग भी लगाए जाते हैं.

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By Sujit kumar

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