अनुसचिवीय कर्मियों की मांग शीघ्र पूरा करे सरकार

सरकारी विभागों के कर्मचारियों की हड़ताल से हो रही परेशानी, कार्य प्रभावित

सरकारी विभागों के कर्मचारियों की हड़ताल से हो रही परेशानी, कार्य प्रभावित

औरंगाबाद शहर. बिहार अनुसचिवीय कर्मियों की सभी 10 मांगें जायज हैं, जिन्हें सरकार को तुरंत मान लेनी चाहिए. इन मांगों की पूर्ति के लिए कर्मियों को हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिन्हें सरकार को महासंघ से वार्ता कर पहले ही मान लेना चाहिए था. उक्त बातें गुरुवार को जिला मुख्यालय में हड़ताली अनुसचिवीय कर्मियों के धरना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महासंघ (गोप गुट) के जिला सचिव सत्येंद्र कुमार ने कही. उन्होंने कहा कि अनुसचिवीय कर्मियों के इस आंदोलन के साथ महासंघ (गोप गुट) चट्टान की तरह तब तक खड़ा रहेगा जब तक उक्त मांगें पूरी न हो जाती है. महासंघ (गोप गुट) के जिलाध्यक्ष रामइशरेश सिंह ने कहा कि बिहार की नीतीश सरकार राज्य कर्मियों के प्रत्येक आंदोलन के खिलाफ सिर्फ तानाशाही रवैया अपनाती रही है तथा कभी भी कर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक तरीके से वार्ता कर जायज मांगों की पूर्ति के लिए प्रयास नहीं करती है. इसके कारण मजबूरी में कभी कर्मचारी तो कभी शिक्षक अथवा अन्य कर्मी हड़ताल और आंदोलन में उतरते रहते हैं. परिणाम यह होता है कि आम जनहित का कार्य बाधित होता रहता है. उन्होंने कहा कि इस बार यह सरकार यदि अपने पुराने रवैये पर ही कायम रहती है, तो इसे सबक सिखाने के लिए इस आंदोलन को इतना जुझारू रूप दिया जायेगा कि यह सरकार भी अन्य जन-विरोधी पूर्ववर्ती सरकारों की तरह ही इतिहास के कूड़ेदान में चली जायेगी. इसी दिशा में संघ ने अपना एक कदम आगे बढ़ाते हुए 25 अगस्त को पटना में राज्य कर्मियों के विशाल प्रदर्शन कार्यक्रम की घोषणा की है जिसमें पूरे बिहार के हजारों राज्यकर्मी भाग लेंगे. उक्त प्रदर्शन में औरंगाबाद जिले से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी पटना जायेंगे.

इन मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं कर्मचारी

धरना के दौरान हड़ताल से संबंधित एक मांग प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें समाहरणालय के लिपिकीय संवर्ग के पद-सोपान एवं ग्रेड-पे में वांछित संशोधन कर नए सिरे से पद-सोपान एवं ग्रेड-पे तय करने, एमएसीपी के बदले अगले ग्रेड के पद-सोपान के अनुसार वेतन निर्धारित करने, अत्यधिक कार्यबोझ को देखते हुए अभियान चलाकर नई बहाली के द्वारा पूरे राज्य के कार्यालयों के कार्यबल में वृद्धि करने, चिकित्सा प्रतिपूर्ति की अनुमानित प्राक्कलित राशि का 75 प्रतिशत अग्रिम भुगतान की व्यवस्था करने, पूर्व की भांति केंद्र के अनुरूप राज्य कर्मियों को प्रतिवर्ष बोनस भुगतान करने, कर्मियों के लिए 50 लाख का दुर्घटना बीमा का प्रावधान करने, समाहरणालय संवर्ग के कर्मियों को पूर्व की भांति जिला कैडर में ही बनाए रखने आदि प्रमुख मांगें शामिल है.

मांगें पूरी होने तक आंदोलन करने का ऐलान

इस सभा में उपस्थित कर्मियों ने यह संकल्प किया कि इन 10 सूत्री मांगों की पूर्ति के लिए सभी लोग राज्य स्तर से लेकर डिवीजन स्तर तक अपना धारावाहिक और जुझारू आंदोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक मांगें पूरी नहीं हो जाती. इस सभा की अध्यक्षता संघ के औरंगाबाद अध्यक्ष भगवान पासवान और जबकि संचालन संघ के न्याज अहसान अंसारी ने किया. इनके अलावा इस सभा को यूनियन के कोषाध्यक्ष राहुल कुमार, उपाध्यक्ष जितेंद्र कुमार, संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र कुमार, कार्यालय सचिव सतीश कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष पिकेश कुमार ने भी संबोधित किया. मौके पर संघ के अनिल कुमार, विजय कुमार, चंदन कुमार रंजन, मो आबिद, मनीष कुमार, राजीव कुमार, जुबैर आलम फिरदौसी, नीतीश कुमार सिंह, सत्येंद्र कुमार, प्रीतम कुमार, देवराज कुमार, रवि कुमार, अमित कुमार भास्कर, रामजी पासवान, आलोक कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.

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