धावा दलों की छापेमारी में आठ श्रमिक हुए मुक्त, दोषी नियोजकों पर प्राथमिकी

डीएम ने श्रम विभाग, नियोजनालय और डीआरसीसी के कार्यों का लिया जायजा, दिये निर्देश

डीएम ने श्रम विभाग, नियोजनालय और डीआरसीसी के कार्यों का लिया जायजा, दिये निर्देश

प्रतिनिधि, औरंगाबाद शहर.

कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री की अध्यक्षता में श्रम विभाग, जिला नियोजनालय एवं डीआरसीसी कार्यालय की संयुक्त समीक्षा बैठक की गयी. बैठक का उद्देश्य जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं, श्रमिक कल्याण, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सृजन एवं बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में की जा रही प्रगति की विस्तृत समीक्षा करना था. श्रम अधीक्षक द्वारा अवगत कराया गया कि जिले में बाल श्रम के विरुद्ध सघन अभियान चलाया गया है. इसके तहत सात धावा दलों का गठन कर 34 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, जिसमें से आठ बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है. दोषी नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है तथा तीन नियोजकों द्वारा पांच बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए प्रति श्रमिक 20,000 की दर से कुल एक लाख की राशि जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा करायी गयी है. डीएम ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए जिले को बाल श्रम से पूर्णतः मुक्त करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाने तथा जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों की भी भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बाल श्रम केवल एक अपराध नहीं बल्कि समाज की चेतना पर कलंक है और इससे मुक्ति के लिए सतत एवं संवेदनशील प्रयास किए जाने चाहिए.

निर्माण कार्यों की करें सतत निगरानी

जिलाधिकारी ने श्रम विभाग के अधिकारियों को जिले में संचालित निर्माण कार्यों पर विशेष निगरानी रखते हुए निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों का व्यापक स्तर पर निबंधन कराने का निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक श्रमिकों को श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिल सके. उन्होंने यह भी कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की सभी योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति, आवास, मातृत्व सहायता, पेंशन एवं स्वास्थ्य बीमा आदि का समय पर लाभ सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

केवाईपी के खराब प्रदर्शन पर जतायी नाराजगी

बैठक के दौरान कुशल युवा कार्यक्रम (केवाईपी) की समीक्षा करते हुए डीएम ने उन प्रशिक्षण केंद्रों पर नाराजगी जतायी जहां प्रशिक्षणार्थियों की उत्तीर्णता का प्रतिशत 70 फीसदी से कम पाया गया है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण से ही युवाओं को सक्षम एवं रोजगारोन्मुख बनाया जा सकता है और जिन केंद्रों में लगातार खराब प्रदर्शन हो रहा है, उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. डीआरसीसी के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने डीआरसीसी प्रबंधक को स्वयं सहायता भत्ता से संबंधित अधिक से अधिक आवेदन सृजित करने तथा युवाओं को स्वरोजगार की योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि युवा जिले की ऊर्जा हैं और उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा अवसर उपलब्ध कराने के लिए डीआरसीसी को हर संभव प्रयास करना चाहिए. बैठक में टास्क फोर्स से जुड़े पदाधिकारियों के साथ-साथ श्रम विभाग, नियोजनालय और डीआरसीसी से संबंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे.

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By Sudhir kumar singh

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