देवकुंड से हसपुरा जाने के लिए तय करनी पड़ रही छह किलोमीटर अधिक दूरी

18 साल बाद भी देवकुंड-अमझर शरीफ सड़क का नहीं हुआ कायाकल्प

18 साल बाद भी देवकुंड-अमझर शरीफ सड़क का नहीं हुआ कायाकल्प

गोह. बिहार के दो ऐतिहासिक धार्मिक स्थल,गोह का देवकुंड धाम व हसपुरा का अमझर शरीफ विकास के मामले में उपेक्षित है. कभी इन्हें शिव सर्किट व सूफी सर्किट से जोड़ने का सपना दिखाया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक यहां एक ढंग की सड़क तक नहीं बनी. हसपुरा-देवकुंड सड़क से प्रतिदिन हजारों लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन गड्ढों और टूटे हिस्सों के कारण हालात इतने खराब हैं कि लोग अब वैकल्पिक रास्ता अपनाने को मजबूर हो गये हैं. देवकुंड से हसपुरा जाने वाले कई लोग अब रघुनाथपुर होते हुए पिरु का रास्ता पकड़ रहे हैं. यह सड़क से छह किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन जर्जर सड़क पर चलने से बेहतर लोग इसे ही सुरक्षित मानते हैं. इस सड़क से रोजाना छात्र स्कूल-कॉलेज के लिए जाते हैं. गड्ढों और कीचड़ की वजह से कई बार छात्र गिरकर चोटिल हो चुके हैं. वहीं, हसपुरा से त्रिसंकट तक की करीब आठ किलोमीटर सड़क पिछले 18 साल से जर्जर है. विभागीय खींचतान और कागजी प्रस्तावों के बीच सड़क की हालत इतनी खराब है कि गाड़ी तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो चुका है.

ढाई करोड़ का प्रपोजल भी धरा रह गया

वर्षो पहले आरडब्ल्यूडी ने 6.3 किमी सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा था. 5.5 मीटर चौड़ी सड़क के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत तय हुई थी. लेकिन वह प्रस्ताव अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सका. अब जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जनता एक बार फिर इस मुद्दे को चुनावी एजेंडे में शामिल कराने की तैयारी कर रही है.

दिखाया गया था रेल लाइन का सपना, सड़क भी नसीब नहीं

विधायक डीके शर्मा ने अपने कार्यकाल में देवकुंड व अमझर शरीफ को शिव व सूफी सर्किट से जोड़ने की पहल की थी. देवघर से वाराणसी तक प्रस्तावित नयी रेललाइन में देवकुंड को शामिल करने की योजना बनी थी. वहीं, अमझर शरीफ को सूफी सर्किट के तहत मुस्लिमों के चार प्रमुख स्थलों से जोड़ने का वादा किया गया था. नेताओं ने मंच से घोषणाएं तो खूब कीं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जहां रेल लाइन का सपना दिखाया गया, वहां सड़क भी नसीब नहीं हुई.

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

देवकुंड धाम महर्षि च्यवन, भगवान राम और भगवान शिव से जुड़ा स्थल है. यहां बाबा बाल पूरी द्वारा स्थापित अग्निकुंड और भगवान राम द्वारा स्थापित नीलम पत्थर का शिवलिंग है. वहीं, अमझर शरीफ मुस्लिम संत दादा सैयदना का मकबरा और खानकाह होने के कारण देशभर के जायरीनों का आस्था केंद्र है. हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन जर्जर सड़क उन्हें सबसे बड़ी चुनौती देती है.

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By Sujit kumar

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