हिंदी दिवस पर औरंगाबाद में सजी साहित्यिक शाम, हास्य-व्यंग्य और काव्य पाठ से देर तक गूंजता रहा परिसर

हिंदी दिवस के अवसर पर औरंगाबाद में एक भव्य साहित्यिक संगोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में हिंदी भाषा के उद्भव-विकास पर चर्चा के साथ-साथ कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा.

हिंदी दिवस के अवसर पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन, औरंगाबाद के तत्वावधान में सोमवार को साहित्यिक संगोष्ठी एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिला मुख्यालय स्थित ब्लॉक मोड़ के समीप पृथ्वीराज चौहान स्मृति भवन के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा, उसके उद्भव-विकास और वर्तमान वैश्विक स्वरूप पर विस्तार से चर्चा हुई. वहीं कवियों की विभिन्न रसों से सजी रचनाओं ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा.

सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. इस दौरान मुख्य अतिथि सिन्हा कॉलेज के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर डॉ शिवपूजन सिंह, समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश सिंह, शिक्षक नेता रामभजन सिंह, डॉ हनुमान राम, महामंत्री धनंजय जयपुरी तथा अरविंद अकेला सहित अन्य अतिथि मौजूद थे. कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कवि विनय मामूली बुद्धि ने किया.

संगोष्ठी और विचार

संगोष्ठी के प्रथम सत्र में वक्ताओं ने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी आज वैश्विक भाषा के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है. हिंदी में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. वक्ताओं ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए सामूहिक और पुरजोर प्रयास की आवश्यकता बताई.

कविताओं की प्रस्तुतियां

दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत संस्था के उपाध्यक्ष सुरेश विद्यार्थी ने सरस्वती वंदना “विद्या की देवी माता, हंस की सवारी” से की. इसके बाद कवि अरविंद अकेला के शृंगारिक काव्य पाठ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. अनुज बचैन ने हिंदी की उत्कृष्टता पर काव्य पाठ किया, जबकि नागेंद्र केसरी ने प्राचीन हिंदी की समृद्ध परंपरा को रचनाओं के माध्यम से उकेरा.

हास्य और व्यंग्य

डॉ सुमन लता की कविता ने श्रोताओं को भाव-विह्वल कर दिया. धनंजय जयपुरी की छंदोबद्ध कविता पर खूब तालियां बजीं. ओम प्रकाश पांडेय ने सवैया, गीतकार प्रवेश जी ने मुक्तक और जनार्दन मिश्र ‘जलज’ ने हिंदी दिवस पर आधारित दोहों की प्रस्तुति देकर वाहवाही लूटी. वहीं विनय मामूली बुद्धि के हास्य-व्यंग्य ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता अपनी हंसी नहीं रोक सके.

गणमान्य उपस्थिति

मौके पर पृथ्वीराज चौहान ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष रामप्रवेश सिंह, उपाध्यक्ष डॉ ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह, वरीय सदस्य चंद्र प्रकाश विकास, प्रो राजेंद्र सिंह, सत्यचंडी धाम के राजेंद्र सिंह, शिक्षक चंद्रकांत सिंह, डॉ संजय कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

By सुजीत कुमार सिंह

सुजीत कुमार सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. क्राइम की खबरों की गहरी समझ है. वर्ष 2014 से प्रभात खबर औरंगाबाद में ब्यूरो चीफ की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं. सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज, औरंगाबाद से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

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