औरंगाबाद में 2.10 करोड़ के चेक डैम निर्माण में अनियमितता का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

ओबरा प्रखंड के होली चक गांव में 2.10 करोड़ की लागत से बने चेकडैम में कथित अनियमितताओं से ग्रामीण गुस्से में हैं. घटिया सामग्री के इस्तेमाल और अधूरे निर्माण पर ग्रामीणों ने जांच की मांग की है.

Aurangabad News : ओबरा प्रखंड के होली चक गांव के समीप लघु सिंचाई विभाग द्वारा करीब 2 करोड़ 10 लाख 28 हजार रुपये की लागत से निर्मित चेक डैम में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और एस्टीमेट के अनुरूप कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

एक दर्जन से अधिक गांवों को मिलना है सिंचाई का लाभ

ग्रामीणों के अनुसार किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में इस चेक डैम का निर्माण कराया गया. इस परियोजना से होली चक, पिसाए, रामनगर, खुदवा, सामा, डिहरी, बिशनपुरा, बिहारी बिगहा, बीछहां समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है. हालांकि निर्माण कार्य में कथित गड़बड़ियों के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.

एस्टीमेट के अनुरूप काम नहीं होने का आरोप

ग्रामीण अमित पांडेय, गोपाल पांडेय, वरुण पांडेय, जितेंद्र पांडेय, प्रेम पांडेय, अर्जुन पांडेय, गौतम कुमार चंद्रवंशी, अखिलेश वर्मा, पंचायत समिति सदस्य सत्येंद्र पासवान, सुभाष वर्मा, धनंजय वर्मा, धर्मेंद्र वर्मा और नंदू वर्मा सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि एस्टीमेट में निर्धारित सामग्री का उपयोग नहीं किया गया. उनका कहना है कि निर्धारित कंपनी के सरिया के बजाय दूसरी कंपनी का सरिया लगाया गया, प्रथम श्रेणी की ईंट के स्थान पर दूसरी श्रेणी की ईंट का उपयोग किया गया तथा चेक डैम के आसपास प्रस्तावित मिट्टी भराई का कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया.

अधिकारियों पर शिकायत अनसुनी करने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान कई बार विभागीय अधिकारियों से गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने की मांग की गई, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया. लोगों ने लघु सिंचाई विभाग के एसडीओ और कनीय अभियंता की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यह योजना तत्कालीन सांसद महाबली सिंह की अनुशंसा पर स्वीकृत हुई थी, लेकिन निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई. उनका कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले शेष राशि की निकासी की तैयारी की जा रही है, जबकि कार्य अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. उन्होंने जिला पदाधिकारी से हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है.

विभाग ने आरोपों को बताया निराधार

इस संबंध में लघु सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता मनोज कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तथा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है.

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लेखक के बारे में

Author: Brajesh divedi

Published by: Nikhil Anurag

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