Bihar Crime News: औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक और रहस्यमयी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. अमझर शरीफ पंचायत के सैदपुर (मोती बिगहा) गांव में पांच महादलित नाबालिग किशोरियों ने एक साथ विषैला पदार्थ खा लिया. इस दर्दनाक घटना में चार बच्चियों की मौत हो गई, जबकि एक किशोरी का इलाज चल रहा है. गांव और आसपास के इलाकों में एक ही सवाल गूंज रहा है- आखिर पांच नाबालिग बच्चियों ने एक साथ मौत को क्यों चुना?
पइन और तालाब के पास बैठकर खाया जहर
नाम न छापने की शर्त पर लगभग 60 वर्षीय एक ग्रामीण महिला ने बताया कि यह घटना जमाल बिगहा जाने वाली सड़क के किनारे, पइन और तालाब के पास हुई. महिला के अनुसार, पांचों किशोरियां वहां बैठीं और एक साथ जहर खा लिया. जहर खाने के बाद एक किशोरी किसी तरह अपने घर तक पहुंचने में सफल रही और परिजनों को पूरी बात बताई. परिजनों ने तुरंत उसका इलाज कराया, जिससे उसकी जान बच गई. वह फिलहाल इलाजरत है. हालांकि, बाकी चार किशोरियां पास के गेहूं के खेत में चली गईं, जहां तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई.
गुरुवार की घटना, शनिवार को हुआ खुलासा
यह घटना गुरुवार को हुई थी. लेकिन शनिवार को जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई, तब पूरे इलाके में खलबली मच गई. सूचना मिलने के बाद प्रभात खबर की टीम गांव पहुंची और सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक पूरे गांव का जायजा लिया.
टीम को हर जगह एक ही तस्वीर दिखी- डर, सन्नाटा और खामोशी. लोग घटना की पुष्टि तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था.
‘नाम मत लिखिए साहब…’
चारों शव एक साथ जलाने का दावा
गांव के एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सर, नाम मत लिखिए… चारों बच्चियों की लाश एक साथ मोती बिगहा श्मशान घाट पर जला दी गई.” इस जानकारी के बाद टीम ने मोती बिगहा श्मशान घाट का निरीक्षण किया, जहां हाल ही में शव जलाने के स्पष्ट निशान मिले. ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस के डर से परिजनों ने चारों शवों का एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया, ताकि मामला बाहर न जाए.
पुलिस की अनभिज्ञता, व्यवस्था पर सवाल
जब इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने घटना से अनभिज्ञता जताई. पुलिस का कहना है कि गांव में चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन किसी ग्रामीण ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. हालांकि, पड़ताल में यह बात सामने आई कि चौकीदार गुरुवार को ही गांव गया था, उस वक्त चारों शव गांव में मौजूद थे. इसके बावजूद जानकारी ऊपर तक क्यों नहीं पहुंची? यह एक बड़ा सवाल बन गया है.
क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? सवाल कई, जवाब अब भी गायब
घटना सामने आने के बाद हसपुरा, गोह और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. लोग अलग-अलग आशंकाएं जता रहे हैं- क्या बच्चियों पर किसी तरह का दबाव था? क्या वे किसी डर, प्रताड़ना या सामाजिक वजह से सहमी हुई थीं? क्या कोई ब्लैकमेलिंग या मानसिक उत्पीड़न का मामला था?फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब अंधेरे में हैं.
SDPO ने क्या बताया?
दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, हसपुरा थानाध्यक्ष से बात की गई. चौकीदार को गांव भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने कुछ भी बताने से इनकार किया. मामला संज्ञान में है और इसकी जांच की जा रही है.
