भीम बराज का बढ़ा जलस्तर, नहर संचालन में फिर होगी देरी क्राॅस रेगुलेटर बना बाधा

मगध क्षेत्र की सिंचाई का आधार भीम बराज में जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर के अधूरे संचालन तंत्र के कारण नहर से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है. किसानों की चिंता बढ़ गई है.

औरंगाबाद/कुटुंबा. मगध क्षेत्र के कई प्रखंडों की सिंचाई का आधार उत्तर कोयल मुख्य नहर परियोजना के भीम बराज में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. रविवार सुबह बराज से राइट साइड कैनाल में करीब 1400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जबकि लगभग 12 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी डाउन स्ट्रीम नदी में प्रवाहित किया जा रहा है.

विभागीय सूत्रों के अनुसार, झारखंड के कोयल नदी जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण बराज में जलस्तर और बढ़ने की संभावना है. पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को अभी क्षमता के अनुसार सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है.

क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर बना संचालन में अड़चन

नहर संचालन में सबसे बड़ी बाधा मुख्य नहर के क्रॉस रेगुलेटर (सीआर) और हेड रेगुलेटर (एचआर) का अधूरा संचालन तंत्र है. अंबा, औरंगाबाद और मदनपुर डिवीजन क्षेत्र में कई स्थानों पर गेट संचालन की व्यवस्था पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है.

इस कारण धान रोपनी के लिए महत्वपूर्ण समय में भी नहर से पानी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है. यदि काम में तेजी नहीं आई तो जुलाई माह भी केवल परीक्षण और एडजस्टिंग में ही बीत सकता है.

अहमदाबाद से रवाना हुआ होइस्टिंग सिस्टम, 22 जुलाई तक पहुंचने की उम्मीद

वाप्कोस के प्रोजेक्ट मैनेजर फारूख खान ने बताया कि री-मॉडलिंग कार्य के दौरान पुराने चैन आधारित गेट सिस्टम को हटाकर आधुनिक रॉड सिस्टम लगाया गया है. सभी स्थानों पर क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर लगाए जा चुके हैं.

उन्होंने बताया कि अब इनके संचालन के लिए होइस्टिंग सिस्टम की जरूरत है. यह सिस्टम अहमदाबाद की कावेरी कंस्ट्रक्शन कंपनी से शनिवार को औरंगाबाद के लिए रवाना किया गया है, जिसके 22 जुलाई तक पहुंचने की संभावना है.

होइस्टिंग सिस्टम लगने के बाद इंस्टॉलेशन, परीक्षण और एडजस्टिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इसके बाद ही नहर का नियमित संचालन शुरू हो सकेगा.

कई जगह अधूरा पड़ा है गेट संचालन का काम

जल संसाधन विभाग के अनुसार, उत्तर कोयल परियोजना के री-मॉडलिंग कार्य की जिम्मेदारी वाप्कोस को दी गई है, जबकि निर्माण कार्य कावेरी कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है.

किसानों का आरोप है कि एजेंसी निर्धारित समय पर जरूरी संरचनाओं का काम पूरा नहीं कर सकी. मुख्य नहर के 152.50 आरडी के पास हेड रेगुलेटर संचालन में परेशानी बनी हुई है. 168.50 आरडी पर बसडीहा नहर का एचआर गेट नहीं लगाया गया है, जबकि सीआर गेट का एडजस्टमेंट भी बाकी है.

इसके अलावा बालूगंज मोड़ के पास 211 आरडी का सीआर गेट अधूरा है. बरिऑवा गांव के पास नहर में बनी अवैध दीवार भी नहीं हटाई गई है. वहीं 210 आरडी पर रसलपुर माइनर और 224 आरडी पर कपसिया नहर के लिए क्रॉस रेगुलेटर का काम भी अधूरा है.

अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में हो रही परेशानी

अधूरे गेट सिस्टम के कारण अंबा, नवीनगर और सदर डिवीजन की कई वितरणियों, उप-वितरणियों और लघु नहरों के कमांड क्षेत्र तक पानी पहुंचाने में परेशानी हो रही है.

किसानों को उम्मीद थी कि समय पर नहर शुरू होने से धान रोपनी में आसानी होगी, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण उनकी चिंता बढ़ गई है.

चीफ इंजीनियर ने कहा, जल्द पूरा होगा काम

जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर ने बताया कि क्रॉस रेगुलेटर ऑपरेट सिस्टम अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, जिसके कारण अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में दिक्कत आ रही है.

उन्होंने बताया कि इस संबंध में वाप्कोस के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है. अहमदाबाद से होइस्टिंग सिस्टम भेजे जाने की सूचना मिली है. सिस्टम पहुंचने के बाद एडजस्टिंग में 5 से 6 दिन का समय लग सकता है.

विभाग का कहना है कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए नहर संचालन जल्द शुरू करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है.

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