Aurangabad News (ओम प्रकाश): जिले के ओबरा के पूर्व विधायक एवं स्वराज पार्टी (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष सोमप्रकाश सिंह ने अपनी विधानसभा सदस्यता समाप्त किए जाने के मामले में बिहार विधानसभा सचिवालय और राजनीतिक विरोधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दाउदनगर के भखरुआं बाजार रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज किया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई है. उन्होंने दावा किया कि अब तक उन्हें बिहार विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी किसी भी अधिसूचना की आधिकारिक प्रतिलिपि प्राप्त नहीं हुई है.
सर्विस मैटर के आधार पर हाई कोर्ट से रद्द हुई थी सदस्यता
सोमप्रकाश सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान कई दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उनकी सदस्यता सर्विस मैटर के आधार पर हाई कोर्ट से रद्द हुई थी. उन्होंने कहा कि सर्विस मैटर की सुनवाई चुनाव याचिका के तहत नहीं हो सकती थी, इसलिए उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितंबर 2015 को हाई कोर्ट के आदेश पर पूर्ण स्थगन (फुल स्टे) लगा दिया था, जिसके आधार पर 26 दिसंबर 2015 को बिहार विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी.
उन्होंने बताया कि 28 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पुराने मामलों की लंबी सुनवाई हुई. जब उनके मामले की सुनवाई का नंबर आया तो अदालत ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि मामला 2010-15 के कार्यकाल से जुड़ा पुराना विषय है और अब सुनवाई योग्य नहीं रह गया है. सिंह ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए पूर्ण स्थगन आदेश की वैधता बनी हुई है. ऐसे में बिहार विधानसभा सचिवालय द्वारा उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की अधिसूचना जारी करना समझ से परे है.
अधिसूचना के पत्र के असली होने पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि जिस पत्र की चर्चा हो रही है, उसकी प्रतिलिपि में उनका नाम अंकित है, लेकिन उन्हें अब तक वह पत्र नहीं मिला है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वही पत्र प्रमोद सिंह चंद्रवंशी को उसी दिन कैसे प्राप्त हो गया. उन्होंने आशंका जताई कि यह पत्र नकली भी हो सकता है. उनका कहना था कि विधानसभा सचिवालय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना जैसी गलती नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा पत्र विधानसभा सचिवालय से जारी हुआ है तो यह लोकतंत्र के मंदिर को कलंकित करने वाला कदम है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर लिया गया फैसला है.
सोमप्रकाश सिंह ने मीडिया के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे जनता के बीच जाकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विधानसभा सचिवालय की होगी.
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