औरंगाबाद की नई पहचान बनी ‘दीदी की रसोई एक्सप्रेस’, जीविका दीदियों का फूड ट्रक बना आत्मनिर्भता का मिसाल

शहर में इन दिनों स्वाद और आत्मनिर्भरता का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. सत्येन्द्र नारायण पार्क के समीप जीविका दीदियों द्वारा संचालित “दीदी की रसोई एक्सप्रेस” लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

Aurangabad News: (औरंगाबाद से सुजीत कुमार सिंह) शहर में इन दिनों स्वाद और आत्मनिर्भरता का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. सत्येन्द्र नारायण पार्क के समीप जीविका दीदियों द्वारा संचालित “दीदी की रसोई एक्सप्रेस” लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यह पहल न केवल शहरवासियों को स्वादिष्ट और किफायती व्यंजन उपलब्ध करा रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश कर रही है.

युवाओं और परिवारों की जुट रही भीड़

फूड ट्रक के आसपास हर दिन युवाओं, छात्रों, परिवारों और स्थानीय लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है. यहां मिलने वाले गरमा-गरम स्नैक्स, स्वच्छता और घरेलू स्वाद लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं. कम कीमत में बेहतर गुणवत्ता और ताजगी मिलने के कारण “दीदी की रसोई एक्सप्रेस” तेजी से शहरवासियों की पसंद बनती जा रही है.

महिलाएं संभाल रही हैं पूरी जिम्मेदारी

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसे जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं पूरी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ संचालित कर रही हैं. भोजन तैयार करने से लेकर ग्राहकों को परोसने तक की सभी जिम्मेदारियां महिलाएं खुद निभा रही हैं. इससे उन्हें रोजगार मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है. यह पहल समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर पेश कर रही है.

“वोकल फॉर लोकल” को मिल रहा बढ़ावा

स्थानीय लोग भी इस प्रयास की जमकर सराहना कर रहे हैं. लोग “वोकल फॉर लोकल” की भावना के साथ जीविका दीदियों का समर्थन कर रहे हैं और बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल से महिलाओं को नई पहचान मिल रही है और समाज में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिल रहा है.

डीएम ने की पहल की सराहना

जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने भी “दीदी की रसोई एक्सप्रेस” की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है.

मेहनत और सपनों की नई पहचान

“दीदी की रसोई एक्सप्रेस” अब केवल एक फूड ट्रक नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मनिर्भरता और सपनों की नई पहचान बन चुकी है. यह पहल यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर और सही समर्थन मिले, तो वे हर क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं.

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By Sakshi Kumari

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