Aurangabad News: स्वतंत्रता आंदोलन की गवाह रही है चौरम की धरती

Aurangabad News:यहीं से नेताजी ने पंडित नेहरू को लिखी थी चिट्ठी

दाउदनगर.

चौरम की ऐतिहासिक धरती स्वाधीनता आंदोलन का गवाह रही है. आज से 85 वर्ष पहले यानी 9-10 फरवरी 1939 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आगमन औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्रखंड के चौरम आश्रम में हुआ था. चौरम आश्रम से नेताजी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था, जो कोलकाता के विक्टोरिया संग्रहालय में आज भी सुरक्षित है.चौरम में किसानों, मजदूरों और स्वतंत्रता सेनानियों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ था और इसी कार्यक्रम में नेताजी का आगमन हुआ था. किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती ने इस सम्मेलन की शुरुआत की थी .चार दिनों तक चले इस सम्मेलन में मगध व शाहाबाद के अलावे अन्य प्रांतो के क्रांतिकारियों ने भी भाग लिया था.

भिखारी ठाकुर ने दिया था निमंत्रण

बुजुर्ग बताते हैं कि 1938 में कोलकाता में भिखारी ठाकुर के माध्यम से कुमार बद्री नारायण सिंह ने एक आमंत्रण पत्र नेताजी को भेजा था. उस पत्र को स्वीकार करते हुए नेताजी चौरम की ऐतिहासिक धरती पर पहुंचे थे. वह ट्रेन से पावरगंज (अब अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन) पहुंचे और वहां से हाथी पर सवार होकर आश्रम पहुंचे थे. यहां उन्होंने अंग्रेजों को ललकारते हुए देशवासियों के समक्ष तुम मुझे खून दो-मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा बुलंद किया था. कहा जाता है कि चौरम आश्रम से ही आजादी के दीवाने राजनीति का पाठ पढ़कर अपने अंदर हौसला भरते थे. ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों में पूर्व मंत्री राम नरेश सिंह, रामविलास सिंह, राम नारायण सैनिक, जागेश्वर दयाल सिंह, जगदेव लाल केसरी, केशव सिंह आदि शामिल थे. चौरम में आयोजन की सबसे बड़ी सफलता यह रही थी कि कुमार बद्री नारायण सिंह ने अपनी 400 बिगहा जमीन किसानों के बीच बांट दी थी. विधिक संघ दाउदनगर के पूर्व अध्यक्ष उमेश सिंह एवं शशि भूषण सिंह बताते हैं कि विधिक संघ की टीम करीब दो दशक पहले जब विक्टोरिया संग्रहालय में गई थी तो वहां लगे एक बोर्ड पर चौरम का नाम लिखा था.

आश्रम का मिट रहा अस्तित्व

ऐतिहासिक चौरम आश्रम का अस्तित्व लगभग मिटाने के कारण पर है. स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों के ठहरने के लिए निर्मित कमरे धराशायी हो चुके हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के समय अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह पवित्र स्थल धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों का शिकार होते जा रहा है. समाजवादी नेता मोहन सिंह यादव ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल को संरक्षित और विकसित करने की आवश्यकता है.

बनाया गया स्मारक

चौरम की ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित किए जाने की जरूरत है. शिलान्यास के कई पत्थर जमींदोज हो गए हैं .पूर्व मुखिया वंदना कुमार व कुछ लोगों के सहयोग से 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्मारक का निर्माण कराया गया, जिसका अनावरण किया गया.अनावरण के बाद स्थानीय ग्रामीणों द्वारा प्रत्येक 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया जाता है. इधर, कुछ वर्षों से अनुमंडल प्रशासन के पदाधिकारी भी माल्यार्पण के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन फिर भी इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित और विकसित किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है. इस दिशा में सकारात्मक पहल किये जाने की आवश्यकता है. फिलहाल, स्थिति यह है कि चौरम मैदान फील्ड पर खेलकूद गतिविधियों का आयोजन होते रहता है. ग्रामीण एवं युवा मनु कुमार ने बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस संघर्ष समिति चौरम का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष वे स्वयं हैं. जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को आगे आकर इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने के लिए पहल करनी चाहिए.

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