Aurangabad News : जिले में बाल श्रम के खिलाफ श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की ओर से सघन अभियान चलाया गया. जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर श्रम अधीक्षक द्वारा गठित धावा दल ने औरंगाबाद व दाउदनगर अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न होटलों और प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया. इस दौरान तीन बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया.
कान्हा स्वीट्स एंड डोसा प्लाजा में काम करते मिले तीन बाल श्रमिक
निरीक्षण के दौरान दाउदनगर अनुमंडल के भखरुआ मोड़ स्थित कान्हा स्वीट्स एंड डोसा प्लाजा में तीन बाल श्रमिक काम करते पाए गए. धावा दल ने तत्काल तीनों बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया. सभी विमुक्त बाल श्रमिकों को सहायता के रूप में तीन-तीन हजार रुपये की राशि प्रदान की गई. इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
दोषी नियोजक के खिलाफ प्राथमिकी की कार्रवाई
बाल श्रमिकों से काम कराने वाले दोषी नियोजक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी. बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी नियोजक को छह माह से दो वर्ष तक के कारावास तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में दोषी नियोजक से 20 हजार रुपये की राशि जिला बाल कल्याण एवं पुनर्वास कोष में जमा कराई जाएगी.
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पुलिस बल के साथ गठित किया गया था धावा दल
अभियान के लिए गठित धावा दल में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी दाउदनगर संतोष कुमार सिंह, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी गोह रंजन कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी हसपुरा धीरज कुमार एवं श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रफीगंज संतोष कुमार सिंह शामिल थे. इनके साथ दाउदनगर थाना के पुलिस बल के सदस्य भी मौजूद रहे. टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच कर बाल श्रम से संबंधित गतिविधियों की जानकारी ली और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की.
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बाल श्रम रोकने के लिए आगे भी जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने कहा है कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य को प्रभावित करता है. इसे रोकने के लिए जिले में जांच और कार्रवाई का अभियान आगे भी जारी रहेगा. प्रशासन ने प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा है कि जांच के दौरान किसी प्रतिष्ठान में बाल श्रमिक काम करते पाए जाने पर संबंधित नियोजक के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.
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