Aurangabad News: कुटुंबा प्रखंड मुख्यालय अंबा स्थित मां सतबहिनी मंदिर के समीप आयोजित 15 दिवसीय आर्द्रा मेला सोमवार की रात संपन्न हो गया. मेले की चहल-पहल खत्म होने के बाद पूरा मेला परिसर भारी कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है. दुकानदारों और झूला संचालकों के हटने के बाद प्लास्टिक, सड़े-गले फल, कागज, थर्मोकोल, पॉलिथीन और अन्य अपशिष्ट पूरे क्षेत्र में बिखरे पड़े हैं. सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है.
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
गुरुवार तक अधिकांश दुकानदार मेला परिसर खाली कर चुके हैं, लेकिन वहां छूटी गंदगी अब स्थानीय लोगों के लिए नयी परेशानी बन गयी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मेला समाप्त होने के बाद यही दयनीय स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन की ओर से समय पर सफाई नहीं करायी जाती. वर्तमान में बरसात के मौसम के कारण कचरा सड़ने से दुर्गंध फैलने के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ गया है.
बतरे नदी तक फैला कचरा
मेला परिसर से करीब 200 मीटर पश्चिम दिशा में स्थित बतरे नदी के तट तक भारी मात्रा में कचरा फैला हुआ है. वहीं अंबा बाजार से मां सतबहिनी मंदिर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-139 (NH-139) के दोनों किनारों पर भी प्लास्टिक और अन्य रासायनिक अपशिष्ट बिखरे पड़े हैं. सड़क किनारे फैले इस कचरे और वाहनों के कारण उड़ती धूल से राहगीरों तथा स्थानीय दुकानदारों को सांस लेने में भारी परेशानी हो रही है.
विवाह भवनों ने बढ़ाई समस्या
स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास संचालित हो रहे निजी विवाह भवनों और मैरिज हॉलों से निकलने वाला कचरा भी इसी खुले क्षेत्र में फेंके जाने से स्थिति और गंभीर हो गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने वाले इस बड़े धार्मिक मेले के लिए जिला प्रशासन को पहले से ही कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए. साथ ही मेला समाप्त होते ही युद्धस्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाना चाहिए.
शीघ्र चलेगा विशेष सफाई अभियान
इस गंभीर सफाई समस्या को लेकर स्वच्छता पर्यवेक्षक रवि प्रकाश ने बताया कि मेला समाप्त होने के बाद फैली गंदगी की पूरी जानकारी प्रखंड प्रशासन को दे दी गई है. उन्होंने कहा कि कुटुंबा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से आवश्यक समन्वय स्थापित कर मेला परिसर और आसपास के सभी नदी तट क्षेत्रों में शीघ्र ही एक बड़ा सफाई अभियान चलाने का प्रयास किया जायेगा, ताकि आम जनता को इस दुर्गंध से तत्काल राहत मिल सके.
Also Read: औरंगाबाद के उमंगा पहाड़ पर बनेगा पार्क, डीएफओ ने किया प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण
