Arrah Cyber Fraud : आरा में साइबर अपराध के एक मामले ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है. साइबर थाने की पुलिस ने म्यूल खातों के जरिए करीब 66 लाख रुपये के अवैध लेन-देन के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाते थे और फिर इन खातों का इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था. दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की जांच जारी है.
म्यूल खातों से लाखों के लेन-देन का खुलासा
आरा साइबर थाने की पुलिस ने म्यूल खाते के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बारा बसंतपुर गांव निवासी ओमप्रकाश राम के पुत्र सोनू राम और धोबहां थाना क्षेत्र के तेतरिया सलेमपुर गांव निवासी सुरेश गोंड के पुत्र मिलन कुमार गोंड के रूप में हुई है.
सरकारी योजना का झांसा देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रलोभन देते थे. इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था. ऐसे खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है.
तकनीकी जांच में सामने आए आरोपियों के नाम
साइबर पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ म्यूल खातों के माध्यम से बड़े स्तर पर अवैध लेन-देन किया जा रहा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के निर्देश पर साइबर डीएसपी रौशन कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गयी. टीम ने तकनीकी और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर जांच आगे बढ़ायी, जिसमें सोनू राम और मिलन कुमार गोंड के नाम सामने आए.
23 सितंबर से 13 अक्टूबर के बीच हुआ बड़ा लेन-देन
साइबर डीएसपी के अनुसार, जांच के दौरान सामने आया कि 23 सितंबर से 13 अक्टूबर 2025 के बीच संबंधित खातों से करीब 66 लाख रुपये का अवैध लेन-देन हुआ. पुलिस अब इस रकम के स्रोत और लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया गुनाह
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपना गुनाह स्वीकार किया है. हालांकि, अवैध लेन-देन के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए पूछताछ जारी है. पुलिस इस मामले में बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है.
पुलिस की जांच से सामने आएगा पूरा नेटवर्क
साइबर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए रकम कहां से आती थी और आगे कहां भेजी जाती थी. साथ ही, जिन लोगों के खातों का इस्तेमाल किया गया, उनकी भूमिका और उन्हें दिए गए प्रलोभन की भी जांच की जा रही है. पुलिस की आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी.
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