भोजपुर में दाखिल-खारिज और परिमार्जन के 22,790 मामले लंबित, अंचल कार्यालयों के चक्कर लगा रहे लोग

भोजपुर जिले में दाखिल-खारिज और परिमार्जन के 22,790 मामले लंबित होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है. सरकारी नियत समय सीमा के बावजूद अधिकारी काम में लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे लोग आक्रोशित हैं. यह स्थिति राजस्व वसूली को भी प्रभावित कर रही है.

Arrah Dakhil Kharij Pending Cases: जिले में दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन से जुड़े मामलों के लंबित रहने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. आरोप है कि अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की मनमानी के कारण लोगों को अपने काम के लिए लगातार अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. कई मामलों में बिना चढ़ावे के काम नहीं होने का भी आरोप लगाया जा रहा है. इससे लोगों में आक्रोश है.

35 दिनों में निष्पादन का निर्देश, अंतिम रूप से 75 दिन की समय सीमा

सरकार की ओर से दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन से जुड़े मामलों के निष्पादन के लिए समय सीमा निर्धारित की गयी है. इसके तहत मामलों का 35 दिनों के अंदर निष्पादन किया जाना है. विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 75 दिनों के अंदर मामले को अंतिम रूप से निष्पादित करने का निर्देश है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामले निर्धारित अवधि के बाद भी लंबित हैं. लोगों का आरोप है कि कई आवेदन लंबे समय तक लंबित रखे जा रहे हैं. इससे जमीन से संबंधित काम प्रभावित होने के साथ राजस्व रसीद कटाने में भी परेशानी हो रही है.

जिलाधिकारी की समीक्षा के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

राजस्व मामलों में सुधार के लिए जिलाधिकारी स्तर से लगातार समीक्षा किये जाने की बात कही जा रही है. पूर्व जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया भी करीब 15 दिनों के अंतराल पर राजस्व मामलों की समीक्षा कर रहे थे. इसके बावजूद अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की कार्यशैली में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है. लोगों का कहना है कि यदि समीक्षा के बावजूद निर्धारित समय सीमा के बाद मामले लंबित रहते हैं, तो संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

75 दिन बाद भी लंबित मामलों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

आरोप है कि 75 दिनों की निर्धारित अवधि गुजरने के बाद भी दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन के कई मामलों पर कार्रवाई नहीं की गयी है. ऐसे आवेदन लंबित पड़े हैं और उनकी स्थिति की जानकारी भी आवेदकों को समय पर नहीं मिल रही है. लोगों का कहना है कि समीक्षा के दौरान लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सके.

राजस्व वसूली पर भी पड़ रहा असर

दाखिल-खारिज और परिमार्जन के मामलों के लंबित रहने का असर राजस्व वसूली पर भी पड़ रहा है. जिले के विभिन्न अंचलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित होने के कारण लोग राजस्व रसीद नहीं कटा पा रहे हैं. इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है. लोगों का कहना है कि समय पर दाखिल-खारिज होने से राजस्व रसीद कटती और सरकार को राजस्व प्राप्त होता.

आवेदन वापस करने को लेकर भी शिकायत

लोगों की शिकायत है कि निर्धारित समय सीमा के बाद कई दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस के आवेदन आवेदक के मेल पर वापस कर दिये जाते हैं. साथ ही टिप्पणी कर दोबारा कागजात जमा करने को कहा जाता है. आवेदकों का सवाल है कि जब आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज पहले ही ऑनलाइन जमा किये जा चुके हैं, तो उन्हीं दस्तावेजों को दोबारा जमा करने की जरूरत क्यों पड़ रही है. उनका कहना है कि दोबारा दस्तावेज जमा करने के बाद भी कई मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही है.

14 अंचलों में हजारों मामले लंबित

जिले के सभी 14 अंचलों में दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन के बड़ी संख्या में मामले लंबित बताये जा रहे हैं.

अंचललंबित मामले
आरा2,000
उदवंतनगर2,200
गड़हनी1,500
चरपोखरी1,400
पीरो2,208
तरारी1,800
सहार1,600
संदेश1,560
कोईलवर1,806
बड़हरा1,709
शाहपुर1,918
अगिआंव1,404
जगदीशपुर2,300
बिहिया1,385

इन आंकड़ों के अनुसार सभी 14 अंचलों में कुल 22,790 मामले लंबित हैं.

कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी

लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन के मामले समय पर निष्पादित नहीं होने से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लोगों ने प्रशासन से लंबित मामलों की समीक्षा कर निर्धारित समय सीमा में निष्पादन कराने और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है.


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लेखक के बारे में

By नरेद्र प्रसाद सिंह

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