Jan Sanskriti Manch: स्थानीय नवादा स्थित जेपी उत्सव भवन में जन संस्कृति मंच भोजपुर की आवश्यक बैठक आयोजित की गयी. बैठक में जन संस्कृति मंच के दूसरे जिला सम्मेलन को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में तय किया गया कि संगठन का दूसरा जिला सम्मेलन आगामी 13 सितंबर को आयोजित किया जाएगा. सम्मेलन में दिल्ली से प्रो. गोपाल प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे.
अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में जन संस्कृति को मजबूत करने पर जोर
दूसरे जिला सम्मेलन को लेकर जन संस्कृति मंच के जिला सह राज्य अध्यक्ष एवं कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन देश और राज्य की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में गति लाने के साथ अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में जन संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि बिहार में बढ़ती अराजकता, आम-आवाम के बढ़ते संकट और चौतरफा फैले भ्रष्टाचार ने संघर्षशील जनता को पीछे धकेला है. वहीं, साहित्य, कला और संस्कृति को सरकारी तंत्र के प्रचार-प्रसार का माध्यम भर बनाकर अश्लीलता और चाटुकारिता के हवाले कर दिया गया है. ऐसे समय में जन संस्कृति मंच का यह सम्मेलन आम-आवाम के साथ की संस्कृति को दिशा देने का काम करेगा.
भोजपुरी कहानी ‘इंगूर-टिकुली’ का हुआ पाठ
बैठक के अंत में कहानीकार रामयश अविकल ने अपनी भोजपुरी कहानी ‘इंगूर-टिकुली’ का पाठ किया. कहानी पाठ के बाद सूर्यप्रकाश, अमित मेहता, सुनील श्रीवास्तव, सुनील चौधरी, सुमन कुमार सिंह तथा विक्रांत सहित अन्य लोगों ने कहानी पर अपनी राय रखी.
वक्ताओं ने कहा कि ‘इंगूर-टिकुली’ निम्न-मध्यवर्गीय घरों के भीतर के यथार्थ को बखूबी व्यक्त करती है. सास-बहू और बेटी के त्रिकोण में असंतुलित होते परिवार की स्थिति पर लेखक ने गंभीरता से विचार किया है.
पारिवारिक रिश्तों के जटिल पहलुओं को किया गया रेखांकित
वक्ताओं के अनुसार कहानी में मां अपनी बेटी को बेटी और बहू को नौकरानी की तरह व्यवहार करती है. इससे वह स्वयं पारिवारिक बिखराव का कारण बन जाती है. लेखक ने ‘मां’ और ‘सासू मां’ की विकट भूमिका वाली स्त्री के चरित्र को कटघरे में खड़ा किया है. कहानी पर चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इसके अन्य पहलुओं को भी शामिल करने के सुझाव दिए.
सम्मेलन में सदस्यों की रही अच्छी उपस्थिति
बैठक में जिले के जन संस्कृति मंच के सदस्यों की अच्छी-खासी उपस्थिति रही. मौके पर कवि सुमन कुमार सिंह, कवि-कहानीकार डॉ. सिद्धनाथ सागर, कवि सुनील चौधरी, कवि-कहानीकार रामयश अविकल, सुनील श्रीवास्तव, रंगकर्मी धनंजय सिंह, अनिल वर्मा, सूर्यप्रकाश, अमित मेहता, विक्रांत, कवि जितेंद्र विद्रोही, वृजनंदन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे. बैठक के अंत में कहानीकार रामयश अविकल ने अपनी भोजपुरी कहानी 'इंगूर-टिकुली' का पाठ भी किया. 'इंगूर-टिकुली' पर सूर्यप्रकाश, अमित मेहता, सुनील श्रीवास्तव, सुनील चौधरी, सुमन कुमार सिंह तथा विक्रांत आदि ने अपनी-अपनी राय भी दी. वक्ताओं ने बताया कि यह कहानी निम्मन मध्यवर्गीय घरों के भीतर के यथार्थ को बखूबी व्यक्त करती है. सास-बहू और बेटी के त्रिकोण में असंतुलित होते परिवार की दशा पर लेखक ने गंभीरता से विचार किया है. माँ अपनी बेटी को बेटी और बहू को नौकरानी सा व्यवहार करती स्वयं पारिवारिक बिखराव का कारण बन जाती है. लेखक ने 'माँ' और 'सासू माँ' की विकट भूमिका वाली स्त्री को कटघरे में खडा़ किया है. वक्ताओं ने कहानी में अन्य पहलुओं को शामिल करने के सुझाव भी दिए. सम्मेलन में जिले के सदस्यों की अच्छी-खासी उपस्थिति रही.मौके पर कवि सुमन कुमार सिंह, कवि कहानीकार डा सिद्धनाथ सागर, कवि सुनील चौधरी, कवि-कहानीकार रामयश अविकल, सुनील श्रीवास्तव, रंगकर्मी धनंजय सिंह, अनिल वर्मा,सूर्यप्रकाश,अमित मेहता, विक्रांत, कवि जितेंद्र विद्रोही, वृजनंदन सिंह आदि उपस्थित रहे.
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