मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना की मिली राशि से की पढ़ाई, दारोगा बन बढ़ाया मान

महिला संवाद कार्यक्रम में जीविका की महिलाओं ने साझा की अपने अनुभव

आरा.

महिला संवाद कार्यक्रम के तहत जिले के विभिन्न प्रखंडों में आयोजित अब तक 492 जीविका महिला ग्राम संगठनों के माध्यम से 92,000 से अधिक महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया है. इन संगठनों ने महिलाओं को एकजुट कर सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की है और समाज में उनकी भूमिका को सशक्त बनाया है. “महिला संवाद ” ने यह सिद्ध किया है कि जब महिलाएं संगठित होकर अपनी आवाज उठाती हैं, तो नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक समावेशी और प्रभावी हो जाती है.

इस कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बिहार सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से प्राप्त लाभ की जानकारी दी. कोईलवर प्रखंड की बीरमपुर पंचायत अंतर्गत गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य मीरा देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अत्यंत निर्धनता के कारण मुझे सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत लाभार्थी के रूप में चुना गया, जिससे जुड़कर मैं आजीविका चला रही हूं. इससे मैं न केवल आत्मनिर्भर बनी हूं, बल्कि अपने पूरे परिवार को भी मजबूत बना रही हूं. उन्होंने आगे बताया कि उनकी बड़ी बेटी को मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना के तहत 50,000 रुपये की सहायता प्राप्त हुई, जिससे उसने आगे की पढ़ाई की और अब बिहार सरकार की महिला आरक्षण नीति का लाभ लेकर बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर चयनित हुई है. उनकी दूसरी बेटी बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से 4 लाख रुपये का ऋण लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है. मीरा देवी की यह कहानी बिहार में महिला सशक्तीकरण की सफलता को उजागर करती है. मीरा देवी जैसी अनेक महिलाएं हैं, जिन्होंने बिहार सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर सफलता की नयी कहानियां लिखी हैं. बिहार सरकार की पहल और महिलाओं के सतत प्रयासों ने राज्य को महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ाया है. इसी प्रयास को और सुदृढ़ करने हेतु राज्यभर में महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिससे प्राप्त सुझाव और मंतव्य नयी नीतियों के निर्माण की आधारशिला बनेंगे. पीरो प्रखंड की सुखरौली पंचायत की महिलाओं ने अपने गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय को उच्च विद्यालय का दर्जा देने की मांग की है. वहीं, जगदीशपुर की हरदिया पंचायत की महिलाओं ने सुझाव दिया है कि जिस प्रकार तेलंगाना राज्य में “स्त्री निधि बैंक ” क्रियाशील है, उसी प्रकार बिहार में भी जीविका दीदियों के लिए एक बैंक की स्थापना की जानी चाहिए. महिला संवाद कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त हो रहे विचार दर्शाते हैं कि महिलाएं केवल अपने व्यक्तिगत हितों की नहीं, बल्कि पूरे गांव, समाज और राज्य के समावेशी विकास की चिंता कर रही हैं. इन रचनात्मक सुझावों से न केवल विकास को नई दिशा मिलेगी, बल्कि उसकी गति भी तेज होगी.

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Author: DEVENDRA DUBEY

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