Gopalpur Panchayat garbage collection : आरा के कोइलवर प्रखंड की गोपालपुर पंचायत के ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से घर-घर कचरा संग्रहण का कार्य बंद पड़ा है. इसके कारण लोग खुले स्थानों पर कचरा फेंकने को मजबूर हैं. कई वार्डों में गीले और सूखे कचरे के ढेर लगने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छर-मक्खियों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
31.74 लाख रुपये खर्च, लेकिन व्यवस्था पर सवाल
सरकारी अभिलेखों के अनुसार पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने के लिए 31.74 लाख रुपये खर्च किए गए. रिकॉर्ड में 2506 घरों के लिए घरेलू डस्टबिन, 10 जोड़ी सामुदायिक डस्टबिन, 12 पैडल रिक्शा, एक ई-रिक्शा, 10 सामुदायिक सोख्ता, 79 एसबीएम चैंबर, 28 आउटलेट पॉइंट और एक वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के निर्माण का उल्लेख है. वहीं स्वच्छता कर्मियों के मानदेय पर भी हर माह 50 हजार रुपये से अधिक खर्च होने की बात कही गई है.
वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट पर मिला ताला
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट बंद मिली और उसके मुख्य द्वार पर ताला लटका था. उनका यह भी दावा है कि पंचायत के कई स्थानों पर सामुदायिक डस्टबिन दिखाई नहीं देते, कई सोख्ता उपयोग में नहीं हैं और कुछ जगहों पर नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है.
स्वच्छता पर्यवेक्षक ने बताई दूसरी वजह
पंचायत स्वच्छता पर्यवेक्षक संतोष कुमार ने बताया कि अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई तक जाने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण कचरा उठाव प्रभावित हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर 2024 में नियुक्ति के बाद उन्हें अब तक केवल चार माह का मानदेय मिला है, जबकि 13 माह का भुगतान लंबित है. उनके अनुसार लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं.
पंचायत सचिव ने आरोपों से किया इनकार
पंचायत सचिव चंदन कुमार ने नियमित सफाई नहीं होने के आरोपों से इनकार किया. उनका कहना है कि पंचायत में नियमित सफाई कराई जाती है और उसकी तस्वीरें प्रतिदिन पोर्टल एवं संबंधित ग्रुप में अपलोड की जाती हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी वार्ड में सफाई नहीं होने की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित स्वच्छता पर्यवेक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि जिस भूमि पर वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट बनाई गई है, उसका निबंधन अभी तक राज्यपाल के नाम से नहीं हो पाया है.
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई
स्थानीय ग्रामीण राजीव कुमार ने आरोप लगाया कि अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई निजी जमीन पर बनाई गई है और पिछले लगभग एक वर्ष से कचरा उठाव प्रभावित है. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.
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