आरा : आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में डिजिटल निगरानी, गर्भवती महिलाओं से बच्चों के टीकाकरण तक सेवाओं का होगा मूल्यांकन

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में डिजिटल निगरानी शुरू की गई है। अब पर्ची कटवाने से लेकर दवा मिलने तक का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा, जिससे सेवाओं में सुधार सुनिश्चित होगा।

Digital Health Monitoring System : ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए शहर नहीं आना पड़े, इसके लिए जिला सहित राज्य के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है.

अब केवल यह नहीं देखा जाएगा कि स्वास्थ्य केंद्र खुला है या बंद, बल्कि मरीज को पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर से परामर्श और दवा मिलने तक कितना समय लगा, इसका भी डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा. साथ ही दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का भी नियमित मूल्यांकन होगा.

साक्षी प्लेटफॉर्म से होगी ऑनलाइन निगरानी

स्वास्थ्य विभाग सभी आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है. इसके लिए 'साक्षी' डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है. इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र की कमियां स्वतः सामने आएंगी. जहां दवा, स्वच्छता, मरीजों के रिकॉर्ड या सेवा वितरण में कमी होगी, उसकी पहचान कर समय पर सुधार किया जाएगा.

अब कागज नहीं, डैशबोर्ड बताएगा केंद्र की स्थिति

पहले स्वास्थ्य केंद्रों का मूल्यांकन कागजी प्रक्रिया से किया जाता था, लेकिन अब सभी जानकारियां डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध होंगी. अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि ओपीडी में कितने मरीज पहुंचे, उन्हें इलाज मिलने में कितना समय लगा और किस केंद्र में किन सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है. इससे निगरानी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी.

गुणवत्ता प्रमाणन पर मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन

एनक्यूएएस के तहत पहले स्वास्थ्य संस्थानों का स्व-मूल्यांकन किया जाएगा, इसके बाद राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की टीम गुणवत्ता का आकलन करेगी. निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले स्वास्थ्य केंद्रों को गुणवत्ता प्रमाणन के साथ अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलेगा.

इस राशि का उपयोग मरीजों की सुविधाओं, आवश्यक उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा. साथ ही मिस्ट्री क्लाइंट के माध्यम से गुप्त निरीक्षण भी किया जाएगा.

स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस

अभियान के पहले चरण में सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्हें पोर्टल पर डेटा दर्ज करने, गुणवत्ता मानकों का पालन करने तथा सेवाओं में निरंतर सुधार लाने की जानकारी दी जाएगी.

इस पहल से गर्भवती महिलाओं की प्रसव-पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल और बच्चों के नियमित टीकाकरण की निगरानी अधिक प्रभावी होगी. इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिलेगी. डिजिटल पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र की कमियों की स्पष्ट पहचान कर समयबद्ध सुधार सुनिश्चित किया जाएगा.

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By Narendra Prasad Sin

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