रक्षाबंधन पर आरा में सुबह 4 बजे से मंदिरों में भीड़, भाई-बहनों ने बांधी राखी; जानें क्या रहा खास

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पूरे जिले में भाई-बहन के स्नेह का पर्व धूमधाम से मनाया गया. इस वर्ष भद्रा का साया न होने से बहनों ने शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी.

Arrah Raksha Bandhan Celebration : भाई और बहन के अटूट संबंध को समर्पित रक्षाबंधन का पर्व पूरे जिले में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस कारण जिले भर में चहल-पहल का माहौल है. सुबह से ही इसकी तैयारी शुरू हो गई और घरों की साफ-सफाई की गई.

स्नान के बाद बहनें मिठाई, राखी व रोली की थाल सजाकर भाइयों का इंतजार करने लगीं. वहीं भाई भी राखी के लिए बहनों का इंतजार कर रहे थे. इस दौरान बच्चों में उत्साह चरम पर रहा. कई तरह की मिठाइयां, चॉकलेट आदि की जमकर खरीदारी हुई.

साथ ही विभिन्न तरह की राखियों की भी खरीदारी हुई. भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और विश्वास के इस पर्व में बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना कर रही हैं.

वहीं सुबह से ही महिला व पुरुष श्रद्धालु मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ कर रहे हैं, जिससे मंदिरों में सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है.

भद्रा का नहीं था साया, बहनों के घर पहुंचने लगे भाई

इस बार रक्षाबंधन पर किसी भी प्रकार की भद्रा या ग्रहण का साया नहीं था. भद्रा काल रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी 27 अगस्त की रात में ही समाप्त हो गया था. स्नान के बाद राखी के शुभ मुहूर्त के अनुसार भाई अपनी बहनों के घर पहुंचने लगे.

एक ही शहर में अलग-अलग मोहल्लों में रहने वाले भाई-बहन एक-दूसरे के घर पहुंच रहे हैं. वहीं दूर रहने वाले भाई-बहन निजी वाहनों के माध्यम से पहुंच रहे हैं. भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें सुबह जल्दी उठकर ही सारी तैयारियां कर ली थीं.

बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधकर उनसे सुरक्षा का वचन लिया और मिष्ठान व भोजन कराया. भाइयों ने भी राखी बंधवाने के बाद बहनों को रक्षा का वचन व उपहार दिया.

डाक के माध्यम से भेजी गई राखियां

जिन बहनों के भाई दूसरे शहरों में दूरदराज में रहते हैं, उन बहनों ने डाक के माध्यम से राखियां भेजी हैं. भाइयों ने उन राखियों को अपनी कलाई में बांधा और उन्हें सुरक्षा का वचन दिया. डाक के माध्यम से जिले में काफी राखियां भेजी गई हैं.

नजदीक के गांव या शहर में रहने वाली बहनों के घर निजी वाहन से पहुंचकर भाई राखी बंधवा रहे हैं.

वृक्षों को बचाने व पौधारोपण का चला अभियान

रक्षाबंधन के विस्तारित स्वरूप में पौराणिक काल से ही वृक्षों में भी राखी बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया जाता है. वृक्ष हमारे जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी होते हैं तथा पर्यावरण संतुलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान होता है.

इस कारण लोग वृक्षों को भी राखी बांध रहे हैं. पूरे जिले में लोग वृक्षों को राखी बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प ले रहे हैं व पौधारोपण कर रहे हैं.

घरों में बने व्यंजन, पुरोहितों ने यजमानों को बांधा जई का बंधन

रक्षाबंधन को लेकर सभी घरों में विभिन्न तरह के व्यंजन व पकवान बनाए गए हैं. परंपरा के अनुसार लोग रक्षाबंधन के दिन खीर-पूड़ी के साथ कई तरह के व्यंजनों का स्वाद लेते हैं. बहनें राखी बांधने के बाद भाइयों को खीर-पूड़ी आदि खिलाती देखी जा रही हैं.

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उधर, जिले भर में पुरोहितों ने भी अपने यजमानों के घर पहुंचकर परंपरा अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले से पानी में अंकुरित कराए गए जई के पौधे को रक्षाबंधन के मंत्र के साथ कान पर रखकर रक्षा का संकल्प दिलाया.


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By नरेद्र प्रसाद सिंह

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