Arrah News:( नरेन्द्र प्रसाद सिंह) बिहार में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी अनुदान के सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग लगातार कड़े फैसले ले रहा है. स्कूलों में फर्जी नामांकन, गलत आंकड़ों के आधार पर अनुदान लेने और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर विभाग अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है.
इसी कड़ी में भोजपुर जिले के अराजकीय प्रस्वीकृत अनुदानित मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों की अब स्थलीय जांच कराने का बड़ा फैसला लिया गया है.
गलत आंकड़ों पर अनुदान लेने वालों पर गिरेगी गाज
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने साफ तौर पर कहा है कि कई संस्थानों द्वारा छात्र संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और गलत आंकड़ों के आधार पर अनुदान लेने की शिकायतें सामने आई थीं. अब इन सभी मामलों की जमीनी जांच होगी. यदि जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है.
प्रखंडवार जांच टीम का गठन
पूरे जिले में पारदर्शी जांच के लिए प्रखंड स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं.
हर टीम में-
- प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) – अध्यक्ष
- प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) – सदस्य सचिव
- एक वरिष्ठ शिक्षक – सदस्य
इन टीमों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है.
क्या-क्या होगी जांच
जांच के दौरान विशेष रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा-
- नामांकित छात्रों की वास्तविक उपस्थिति
- शिक्षण व्यवस्था और पढ़ाई की गुणवत्ता
- विद्यालयों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं
- सरकारी अनुदान का सही उपयोग
सभी प्रखंडों में चलेगा अभियान
आरा, बिहिया, गड़हनी, जगदीशपुर, कोईलवर, पीरो, संदेश, सहार, शाहपुर और तरारी सहित जिले के सभी प्रखंडों में यह जांच अभियान चलाया जाएगा. इसके तहत संस्कृत विद्यालयों और मदरसों की सूची तैयार कर ली गई है और अब एक-एक संस्थान का भौतिक सत्यापन किया जाएगा.
शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम
प्रशासन की इस सख्ती को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे जहां एक ओर फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी ओर वास्तविक छात्रों को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी.
स्पष्ट है कि अब शिक्षा के नाम पर गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं है और आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर और सख्ती देखने को मिल सकती है.
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