अररिया. देशभर में रक्षाबंधन का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करती है, जबकि भाई बहन की जीवनभर रक्षा करने का संकल्प लेता है. मान्यता है कि यह परंपरा साल में एक बार बहनों को मायके लौटने और पारिवारिक रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर भी देती है.
इंद्राणी ने इंद्र को बांधा था रक्षा सूत्र
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था. इसके बाद से रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा को रक्षाबंधन पर्व से जोड़कर देखा जाता है. समय के साथ यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक स्नेह का प्रमुख त्योहार बन गया.
बाजारों में सजीं राखियों की दुकानें
रक्षाबंधन को लेकर अररिया के बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिल रही है. बाजार में जगह-जगह राखियों की दुकानें सजी हैं. दुकानों पर बच्चों से लेकर महिलाओं तक के लिए अलग-अलग डिजाइन और रंगों की राखियां उपलब्ध हैं. बाजार में 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की आकर्षक राखियां बिक रही हैं. वहीं मिठाई दुकानों पर भी खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है.
सुबह से दोपहर तक राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
पंडित चंद्रानंद मिश्रा के अनुसार 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से 09:48 बजे तक रहेगा. इसमें अमृत-सर्वोत्तम काल सुबह 09:10 बजे से 09:48 बजे तक बताया गया है.
दोपहर में भी राखी बांधने का विकल्प
उन्होंने बताया कि राखी बांधने के लिए दोपहर का वैकल्पिक शुभ समय 01:52 बजे से शाम 04:35 बजे तक रहेगा. वहीं राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक बताया गया है. इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है.
प्रेम और विश्वास का पर्व है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर है. पर्व को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल और घरों में चल रही तैयारियों से अररिया में भी त्योहार का उत्साह देखने को मिल रहा है.
