21 पंचायतों में दो-चार वार्डों को छोड़ घरों में नहीं आ रहा शुद्ध पानी, टंकियां बनीं शोपिसजनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के समक्ष शिकायत के बाद भी समाधान नहीं
पलासी (अररिया). सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल-जल योजना प्रखंड में पूरी तरह विफल हो गई है. 21 पंचायतों के दो-चार वार्डों को छोड़कर करीब-करीब सभी वार्डों में नल में पानी आना बंद है. सरकार ने योजना के तहत युद्धस्तर पर हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की मुहिम चलाई थी. पंचायतों में आबादी के हिसाब से एक-दो पानी टंकी और घर-घर तक पाइप लाइन बिछाई गई.
शुरुआत में मिला था साफ पानी
शुरुआत में कहीं एक-दो महीने तो कहीं दो से चार दिन ही साफ पानी मिला. उसके बाद टंकियों से दूषित पानी आने लगा और फिर पूरी सप्लाई ठप हो गई. अब नल-जल का पानी कहां गया, किसी को पता नहीं. आमजनों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. मजबूरी में लोगों को फिर से आयरन युक्त चापाकल और नलकूप का पानी पीना पड़ रहा है.
अधिकारी और संवेदक काट रहे चांदी पानी टंकी के संचालकों का कहना है कि कहीं मोटर खराब है तो कहीं पाइप लाइन फटी है. कहीं मानदेय नहीं मिलने से सप्लाई बंद है. वहीं संबंधित विभाग के अधिकारी और संवेदक इस योजना में चांदी काट रहे हैं. पंचायतों में लगने वाले सहयोग शिविरों में भी नल-जल को लेकर दर्जनों शिकायतें आ रही हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है.
संक्रमण का खतरा
चहटपुर पंचायत के वार्ड- 03 के मो शाहजहां, मो असरफ, मो नदीम, मो शमसाद, मो इरशाद, मो शाहिद, मो कुर्बान, मो हासीम, बीबी बानो, बीबी नजहत, बीबी कुदरती खातुन, बीबी आइसा, बीबी मुर्शीदा सहित कई लोगों ने बताया कि उक्त वार्ड में लगा पानी टंकी से दूषित पानी आ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है. वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि विभागीय जेई से शिकायत के बाबजूद भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा.इस तरह की स्थिति करीब करीब सभी वार्डों का बना हुआ है.
पंप संचालकों का चल रहा मनमानी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंप संचालक मनमर्जी से पंप संचालित करता है.साथ हीं संचालक के स्थान पर परिवार के लोगों द्वारा पंप संचालित किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की है.सीमांचल क्षेत्र में अधिकांश गांवों का पानी आयरन युक्त है. जिससे लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. ऐसे में शुद्ध पेयजल देने वाली नल-जल योजना सिर्फ कागजों और चुनावी भाषणों तक सीमित रह गई है. ग्रामीणों की मांग नल-जल योजना की उच्च स्तरीय जांच कराकर सभी टंकियों को तुरंत चालू कराया जाए और दोषी अधिकारियों व संवेदकों पर कार्रवाई हो.
