फारबिसगंज नगर परिषद क्षेत्र में शहर को रोशन करने के उद्देश्य से लगाए गए हाईमास्ट लाइट के खंभे पिछले कई वर्षों से बिना लाइटों के खड़े हैं. देखरेख और लाइट न लगने के कारण ये खंभे अब सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गए हैं. स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने नगर परिषद प्रशासन से इन खंभों के जीर्णोद्धार, नई लाइटें लगाने और शहर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का दायरा बढ़ाने की पुरजोर मांग की है.
धरातल पर नहीं उतर सकी सांसद निधि की योजना
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूर्व सांसद निधि से फारबिसगंज नगर परिषद और आसपास के विधानसभा क्षेत्रों में हाईमास्ट लाइट लगाने की योजना मंजूर हुई थी. स्थानों पर खंभे (पोल) तो खड़े कर दिए गए, लेकिन संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों की लापरवाही के कारण उन पर कभी लाइटें नहीं लगाई जा सकीं. यदि नगर परिषद प्रशासन इन खड़े खंभों का उपयोग कर लाइटें लगवा दे, तो शहर के प्रमुख चौराहे और इलाके आसानी से जगमगा सकते हैं.
नगर परिषद करा रही सर्वे, जल्द जलेंगी लाइटें: मुख्य पार्षद
इस मुद्दे पर नगर परिषद की मुख्य पार्षद वीणा देवी ने बताया कि नगर क्षेत्र में लगभग 12 से 15 स्थानों पर हाईमास्ट लाइट के खंभे लगे हुए हैं. उन्होंने आश्वस्त किया कि नगर परिषद प्रशासन की ओर से इन सभी खंभों की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वे कराया जा रहा है. सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही खंभों की मरम्मत कराकर नई लाइटें लगाई जाएंगी और पूरे नगर परिषद क्षेत्र को जल्द ही रोशन कर दिया जाएगा.
अपराध नियंत्रण के लिए CCTV कैमरे बढ़ाने और मरम्मत की मांग
रोशनी के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से शहर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है. लोगों का कहना है कि पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण अप्रिय घटनाओं के बाद अपराधियों की पहचान करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. हाल ही में राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रधान महासचिव ई. आयुष अग्रवाल ने भी व्यापारियों और आम नागरिकों के हित में खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करने तथा नए संवेदनशील स्थानों पर नए कैमरे लगाने की मांग उठाई थी.
