Vijay Yadav : क्रिकेट में गेंदबाजों को एक हाथ से गेंदबाजी करते हुए तो आपने खूब देखा होगा, लेकिन अगर कोई गेंदबाज एक ही मैच में दोनों हाथों से स्पिन गेंदबाजी करे और बल्लेबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर दे, तो यह नजारा निश्चित तौर पर खास बन जाता है. यूपी टी20 लीग के सीजन-4 में 24 साल के विजय यादव अपनी इसी अनोखी गेंदबाजी शैली से सुर्खियां बटोर रहे हैं. वह दाएं और बाएं दोनों हाथों से गेंदबाजी करने में सक्षम हैं और अपनी इस कला से लगातार बल्लेबाजों को चकमा दे रहे हैं.
दोनों हाथों से गेंदबाजी बनी विजय की पहचान
गोरखपुर के रहने वाले विजय यादव को दोनों हाथों से गेंदबाजी करने की खास काबिलियत हासिल है. वह परिस्थिति और बल्लेबाज के हिसाब से अपना हाथ बदल सकते हैं. उनकी यह क्षमता उन्हें दूसरे गेंदबाजों से अलग बनाती है. हाल ही में विजय ने अपनी पुरानी टीम गौर गोरखपुर लायंस के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने दो अहम विकेट चटकाकर डिफेंडिंग चैंपियन काशी रुद्रास की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. विजय सिर्फ विकेट लेने की क्षमता के लिए ही नहीं, बल्कि किफायती गेंदबाजी के लिए भी पहचाने जा रहे हैं. स्टंप्स के आसपास सटीक गेंदबाजी करते हुए वह बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखते हैं.
5.2 लाख रुपये में काशी रुद्रास से जुड़े
विजय यादव ने यूपी टी20 लीग में 2024 सीजन से कदम रखा था. शुरुआती दो सीजन उन्होंने गौर गोरखपुर लायंस के लिए खेले. इसके बाद 2026 की नीलामी में काशी रुद्रास ने उन्हें 5.2 लाख रुपये में अपनी टीम का हिस्सा बनाया. विजय के लिए यह रकम दबाव की वजह नहीं बनी. उन्होंने बताया था कि उन्होंने नीलामी की कीमत के बारे में ज्यादा नहीं सोचा और क्रिकेट के लिए किया गया निवेश उनके लिए ज्यादा मायने रखता था.
ऐसे सीखी दोनों हाथों से गेंदबाजी
विजय के लिए दोनों हाथों से गेंदबाजी करना शुरुआत में कोई अलग पहचान बनाने की योजना नहीं थी. उन्होंने बताया था कि उनका बायां हाथ पहले से थोड़ा बेहतर काम करता था. दाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ दाएं हाथ से गेंदबाजी करते समय उन्हें कुछ परेशानी होती थी. इसके बाद उन्होंने बाएं हाथ से गेंदबाजी पर मेहनत शुरू की. लगातार अभ्यास के बाद उन्हें बाएं हाथ से गेंदबाजी पर बेहतर नियंत्रण मिलने लगा. हालांकि, दोनों हाथों से गेंदबाजी करना उनके लिए आसान नहीं है. विजय के मुताबिक, लोगों को यह जितना सरल दिखाई देता है, इसके पीछे उतनी ही ज्यादा मेहनत और दोनों हाथों से लगातार अभ्यास करना पड़ता है.
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2011 विश्व कप ने बदली जिंदगी की दिशा
विजय यादव का क्रिकेट से जुड़ने का सफर भी काफी दिलचस्प रहा. गोरखपुर में जन्मे विजय के पिता पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. उन्होंने 2012 में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. इसके पीछे 2011 में भारत की विश्व कप जीत की बड़ी भूमिका रही. टीम इंडिया की उस जीत से प्रभावित होकर विजय ने क्रिकेट में कुछ बड़ा करने का सपना देखा और आगे चलकर उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की अंडर-19 और अंडर-23 टीमों का प्रतिनिधित्व किया.
बल्लेबाजी में भी लगा सकते हैं लंबे छक्के
विजय यादव सिर्फ गेंद से ही योगदान नहीं देते. वह निचले क्रम में दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और कम गेंदें मिलने की वजह से बड़े शॉट खेलने की कोशिश करते हैं. उनका लक्ष्य निचले क्रम में तेजी से रन बनाकर टीम के स्कोर में उपयोगी योगदान देना है. यानी विजय के रूप में काशी रुद्रास के पास गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने वाला खिलाड़ी मौजूद है. विजय यादव भारतीय स्टार विराट कोहली को अपना आदर्श मानते हैं. उनका कहना है कि कोहली का क्रिकेट के प्रति जुनून, मेहनत, समर्पण और आक्रामक रवैया उन्हें काफी प्रेरित करता है.
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