RR के असिस्टेंट कोच विक्रम राठौर ने वैभव सूर्यवंशी को बताया स्पेशल खिलाड़ी, कहा- उसकी चोट बहुत गंभीर नहीं

RR vs SRH : राजस्थान रॉयल्स के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने शनिवार को टीम के लिए 37 गेंदों में 103 रन बनाएं, जिसमें 5 चौके और 12 छक्के शामिल हैं. उनकी पारी और उनकी टीम के असिस्टेंट कोच ने विक्रम राठौर ने तारीफ की और कहा कि हमने बड़ा स्कोर खड़ा किया था, लेकिन कुछ गलतियों की वजह से मैच हार गए.

RR vs SRH : 228 रन का बड़ा स्कोर करने के बाद भी राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम को सनराइजर्स हैदराबाद ने 5 विकेट से हरा दिया. इस मैच में वैभव सूर्यवंशी ने 103 रन बनाया, लेकिन उसका शतक बेकार चला गया. मैच के बाद टीम के असिस्टेंट कोच विक्रम राठौर ने 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को बहुत खास खिलाड़ी बताया. उन्होंने वैभव के हैमस्ट्रिंग की चोट के बारे में बात करते हुए कहा कि वह बहुत गंभीर नहीं है.

वैभव की चोट का इलाज जारी

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए विक्रम राठौर ने कहा कि टीम ने पहले ही सूर्यवंशी के टैलेंट की तारीफ की है और कन्फर्म किया है कि इलाज के बाद युवा खिलाड़ी की हालत स्थिर लग रही है.उन्होंने कहा कि जब चोट लगी तो हैमस्ट्रिंग की समस्या की चिंता थी, लेकिन फिलहाल यह गंभीर नहीं लग रही है. आने वाले दिनों में और साफ तौर पर पता चलने की उम्मीद है कि उनकी चोट कैसी है.उम्मीद है कि एक-दो दिन में पता लग जाएगा कि उनकी चोट कैसी है.

मजबूत टीम के खिलाफ कैच छोड़ना बड़ी भूल

सनराइजर्स हैदराबाद से हार के बारे में बात करते हुए विक्रम राठौर ने कहा कि फील्ड में हमने कई गलतियां की, जो हार की वजह बनी. उन्होंने माना कि मजबूत विरोधी टीम के खिलाफ कैच छूटना महंगा पड़ा और इस बात पर जोर दिया कि अच्छी टीमों और बैट्समैन के खिलाफ ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं की जा सकती. कैच का छूटना मैच का टर्निंग पॉइंट था. जब आप अच्छी टीमों के खिलाफ खेल रहे होते हैं, तो आप उन्हें मौके नहीं दे सकते. उन्होंने कहा, हमने कुछ मौके गंवा दिए, और इसी वजह से हम मैच हार गए.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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