TMC सांसद यूसुफ पठान ने शेयर की विवादित अदीना मस्जिद की तस्वीरें, हो गए ट्रोल, BJP ने कहा- ‘आदिनाथ मंदिर’

Yusuf Pathan: पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल सांसद यूसुफ पठान द्वारा पश्चिम बंगाल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित अदीना मस्जिद का दौरा करने और वहां की तस्वीरें पोस्ट करने के बाद लंबे समय से चला आ रहा विवाद फिर से शुरू हो गया है. पठान ने अपनी पोस्ट में अदीना मस्जिद को वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना बताया. इस पर भाजपा और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई, जिन्होंने बताया कि यह आदिनाथ मंदिर था और मस्जिद उसी पर बनाई गई थी.

Yusuf Pathan: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने गुरुवार को मालदा की एक प्राचीन मस्जिद की अपनी यात्रा की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं, जिससे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तूफान आ गया. पठान ने 16 अक्टूबर को अदीना मस्जिद का दौरा किया और एक्स पर एक पोस्ट में निर्माण की वास्तुकला और ऐतिहासिक मूल्य की प्रशंसा की. इस मस्जिद पर अभी विवाद है. भारतीय जनता पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर पठान को बताया कि यह कोई मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर है, जिसे आदिनाथ मंदिर कहा जाता है. पठान के पोस्ट के बाद उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स जमकर ट्रोल कर रहे हैं. TMC MP Yusuf Pathan shared photos of controversial Adina Mosque trolled BJP called it Adinath Temple

यूसुफ पठान ने मस्जिद के निर्माण कला की तारीफ की

पठान ने मस्जिद की कई तस्वीरें शेयर करते उनकी तारीफ में लिखा, ‘पश्चिम बंगाल के मालदा में स्थित अदीना मस्जिद एक ऐतिहासिक मस्जिद है, जिसका निर्माण 14वीं शताब्दी में इलियास शाही वंश के दूसरे शासक सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था. 1373-1375 ईस्वी में निर्मित, यह अपने समय में भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद थी, जो इस क्षेत्र की स्थापत्य कला की भव्यता को दर्शाती है.’ हालांकि, पश्चिम बंगाल भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस सांसद के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्जिद को ‘आदिनाथ मंदिर’ बताया.

1300 के दशक में हुआ था मस्जिद का निर्माण

ऐतिहासिक अदीना मस्जिद का निर्माण 1300 के दशक में बंगाल सल्तनत के दौरान सिकंदर शाह ने करवाया था, जो खुद भी इसी मस्जिद में दफन हैं. इस मस्जिद के डिजाइन में बंगाली, अरब और फारसी शैली की वास्तुकला का समावेश है और इसकी विशाल वास्तुकला दमिश्क की उमय्यद मस्जिद से मिलती जुलती है. पिछले साल, कुछ हिंदू पुजारियों ने अदीना मस्जिद के अंदर अनुष्ठान आयोजित किए थे और दावा किया था कि उन्होंने इसकी वास्तुकला में कुछ हिंदू देवताओं को देखा है. बंगाल में कई पुजारियों और हिंदू समूहों ने यह भी दावा किया कि यह मस्जिद एक हिंदू मंदिर के ऊपर बनाई गई थी.

सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुए यूसुफ पठान

बेहरामपुर से तृणमूल सांसद को सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा, जहां यूजर्स ने पठान पर इस ढांचे की कथित उत्पत्ति को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. इरफान पठान नाम के एक फर्जी अकाउंट से लिखा गया, भाई, हमें ऐसी चीजें पोस्ट नहीं करनी चाहिए. ये हमारे अपने अस्तित्व के लिए है, कृपया ऐसी पोस्ट न करें. हम गोमांस निजी तौर पर खाते हैं ताकि वे हम पर हमला न करें, इसलिए कृपया ये पोस्ट न करें.’ कई और यूजर्स तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि मस्जिद के बाहरी हिस्से में हाथियों और नृत्य करती आकृतियों की नक्काशी है.

2022 में शुरू हुआ विवाद

मंदिर-मस्जिद विवाद पहली बार 2022 में तब शुरू हुआ जब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रथींद्र बोस ने ट्वीट किया कि आदिनाथ मंदिर मस्जिद के ढांचे के नीचे दबा हुआ है. बोस ने ट्वीट किया, ‘आदिनाथ मंदिर इस अदीना मस्जिद के नीचे स्थित है… यह इतिहास बहुतों को नहीं पता है.’ उन्होंने इस ढांचे की उत्पत्ति के बारे में नई रुचि जगाई. यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे सहित कई राज्यों में मंदिर-मस्जिद विवाद बढ़ने लगे हैं. दो साल बाद 2024 में, यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आया जब एक हिंदू पुजारी हिरण्मय गोस्वामी ने भक्तों के एक समूह का नेतृत्व किया और अदीना मस्जिद के परिसर के अंदर पूजा की. पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और संभावित सांप्रदायिक अशांति को टाल दिया. मालदा जिले में मुसलमानों की आबादी लगभग 52% है.

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By Amleshnandan sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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