धोनी को अपनी प्रेरणा मानते हैं मुकुल चौधरी,लखनऊ सुपर जायंट्स को दिलाई अंतिम गेंद पर जीत

Mukul Choudhary IPL : मैं प्रेशर पर नहीं, मौके पर फोकस करता हूं. मेरा यह मानना है कि अगर भगवान ने मुझे मौका दिया है, तो मैं अपनी काबिलियत साबित करके रहूंगा. मैं पिछले 5-6 महीने से छक्का लगाने की प्रैक्टिस कर रहा था, जिसका इस्तेमाल मैंने इस मैच में किया. लखनऊ की टीम के नए हीरो बने मुकुल चौधरी ने अपनी शानदार बैटिंग और टीम की जीत के बाद यह बयान दिया है.

Mukul Choudhary IPL : कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ लखनऊ सुपर जायंट्‌स को रोमांचक जीत दिलाने वाले मुकुल चौधरी कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानते हैं. मुकुल ने इस मैच में महज 27 गेंदों में 54 रन बनाए और अंतिम ओवर में उन्होंने 12 रन बटोरे. मुकुल की पारी में 7 छक्के और 2 चौके शामिल हैं.

धोनी के फिनिशिंग अंदाज के हैं कायल

अपनी 54 रन की पारी में मुकुल ने सात छक्के लगाए, जिनमें एक हेलीकॉप्टर शॉट भी शामिल था. इस शाॅट ने सबको धोनी की याद दिला दी. मुकुल ने बताया कि वह बचपन से इस शॉट की प्रैक्टिस करते आ रहे हैं और धोनी के फिनिशिंग अंदाज से काफी प्रभावित रहे हैं. उन्होंने अपनी इस शानदार पारी को धोनी और अपने पिता को समर्पित किया. मुकुल ने कहा कि मैं बस अपने शॉट्स खेलने पर फोकस करता हूं. अगर बॉल मेरे एरिया में आती है, तो मैं उसे हिट करता हूं, बाकी, जो भी होगा मैं उसपर ज्यादा सोचता हूं.

पंत ने भरोसा जताया, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा

मुकुल चौधरी अपने करियर का तीसरा आईपीएल मैच खेल रहे थे, लेकिन उन्होंने दबाव भरे हालात में जिस संयम और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया, वह काबिले तारीफ रहा. मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए मुकुल ने कहा कि कप्तान ऋषभ पंत और कोच जस्टिन लैंगर ने उन पर जो भरोसा जताया, उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा. पंत ने उन्हें सलाह दी कि ज्यादा मत सोचो, अपने प्रोसेस पर भरोसा रखो और गेंद को देखकर खेलो. इस सलाह ने मुकुल को दबाव से बाहर निकलने में मदद की.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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