IND vs NZ : क्या रोहित शर्मा की ‘सेना’ कीवियों से लेगी 2019 का बदला और ध्वस्त करेंगी सारे रिकाॅर्ड

भारत में विश्व कप के अपने सभी नौ मैच जीतकर अंकतालिका में नंबर वन पोजिशन पर है, जबकि न्यूजीलैंड नौ में से पांच मैच जीतकर चौथे स्थान पर है. विश्व कप 2023 में भारत के मुकाबले में न्यूजीलैंड कहीं भी टिकता नहीं हैं.

INDvsNZ ICC World Cup 2023 : विश्व कप 2023 अब अपने अंतिम पड़ाव के करीब पहुंच चुका है. 15 नवंबर को भारत बनाम न्यूजीलैंड सेमीफाइनल मैच खेला जाना है. सेमीफाइनल का यह मुकाबला बहुत ही खास है.

भारत में विश्व कप के अपने सभी नौ मैच जीतकर अंकतालिका में नंबर वन पोजिशन पर है, जबकि न्यूजीलैंड नौ में से पांच मैच जीतकर चौथे स्थान पर है. विश्व कप 2023 में भारत के मुकाबले में न्यूजीलैंड कहीं भी टिकता नहीं हैं.

भारत बनाम न्यूजीलैंड के मैच को लेकर लोगों को उत्सुकता इस बात को लेकर है कि यह वही न्यूजीलैंड की टीम है, जिसने 2019 के विश्व कप में भारत का मैच खराब किया था और भारत को 18 रन से हराकर सेमीफाइनल मुकाबला जीत लिया था और भारत के सपने को तोड़ दिया था.

विश्व कप 2023 में भारत की कप्तानी रोहित शर्मा के हाथों में है और न्यूजीलैंड के कप्तान के विलियमसन हैं. अगर दोनों के कप्तानी के रिकाॅर्ड को देखें तो रोहित शर्मा ने अपनी कप्तानी में अबतक 43 मैच खेले हैं और उनमें से 33 में उन्हें जीत मिली है, नौ मैच हारे हैं और एक मैच का रिजल्ट नहीं आया है.

रोहित शर्मा की कप्तानी में जीत का प्रतिशत लगभग 80 प्रतिशत का है. हालांकि सभी फाॅर्मेट के क्रिकेट में रोहित शर्मा की जीत का प्रतिशत 77 है. वे विश्व के श्रेष्ठ कप्तानों में शुमार हैं.

वहीं बात अगर केन विलियमसन की करें, तो वे एक बेहतरी कप्तान हैं और अबतक उन्होंने 90 मैच खेले हैं, जिनमें से 46 मैच जीते हैं, 39 हारे हैं और एक टाई हुआ है. चार मैच का कोई परिणाम नहीं निकला है.

केन विलियमसन और रोहित शर्मा की कप्तानी की तुलना करें तो रोहित शर्मा का जीत प्रतिशत जहां 80 के आसपास का है, वहीं केन विलियम के जीत का प्रतिशत 51 है. इस लिहाज से रोहित शर्मा उनपर भारी हैं.

रोहित शर्मा और के विलिमसन की कप्तानी का औसत अगर देखें तो रोहित शर्मा ने 43 मैच अपनी कप्तानी में खेले हैं जबकि विलिमसन ने 90 मैच खेला है. इस लिहाज से उनका अनुभव ज्यादा है.

रोहित शर्मा अपनी बैटिंग और रणनीति के दम पर अकेले ही टीम को जीत दिलाने का माद्दा रखते हैं, वहीं केन विलियमसन के पास भी कप्तानी का अच्छा-खासा अनुभव है. इस लिहाज से कल भारत और न्यूजीलैंड के बीच शानदार मुकाबला होगा.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबले की अगर बात करें विश्व कप में ये दोनों टीम दस बार आमने-सामने हुई है, जिसमें से पांच बार न्यूजीलैंड ने मैच जीता है, चार बार भारत ने और एक मैच का रिजल्ट नहीं निकला था.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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