CWG 2026: पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन अब विवाद का कारण बन गया है. ग्लासगो में अपने खिताब का बचाव करने उतरे अरशद फाइनल-8 में भी जगह नहीं बना सके और नौवें स्थान पर रहे. इसके बाद पाकिस्तान की खेल व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अरशद की खराब फॉर्म के पीछे सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि तैयारियों में प्रशासनिक लापरवाही भी वजह रही. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने पिछले साल उनके लंबे समय से कोच रहे सलमान बट्ट को बनाए रखने को लेकर हुए विवाद के बाद उनसे दूरी बना ली थी. इसके बाद ट्रेनिंग से जुड़े कई अनुरोधों पर भी ध्यान नहीं दिया गया.
विदेशी कोच नहीं मिल सके
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोच और ट्रेनर नियुक्त करने के लिए जरूरी फंड जारी नहीं किया. इसकी वजह से अरशद को लाहौर में स्थानीय स्टाफ के साथ ही अभ्यास करना पड़ा. पिछले वर्षों में वह दक्षिण अफ्रीका के कोच टर्सियस लीबेनबर्ग के साथ ट्रेनिंग करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने केवल सलमान बट्ट की देखरेख में अभ्यास किया. लाहौर और ग्लासगो के मौसम में बड़े अंतर का भी उनकी तैयारी पर असर पड़ा.
कोच ने भी मानी तैयारी की कमी
अरशद के कोच सलमान बट्ट ने भी स्वीकार किया कि उनका शिष्य अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस में नहीं था. कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले अरशद ने केवल स्विट्जरलैंड में एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था, जो इतने बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के लिए पर्याप्त नहीं माना गया.
पूर्व ओलंपियन ने उठाए सवाल
पाकिस्तान के पूर्व ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज हुसैन शाह ने इसे देश की खेल व्यवस्था की विफलता बताया.
अरशद एक साधारण परिवार से निकलकर अपने दम पर ओलंपिक चैंपियन बने और पाकिस्तान का नाम रोशन किया. इसके बावजूद वह राष्ट्रमंडल खेलों की सही तैयारी नहीं कर सके. यह हमारे खेल तंत्र की दुखद तस्वीर पेश करता है.
अरशद नदीम के प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान में खेल प्रशासन की कार्यशैली पर बहस तेज हो गई है और फेडरेशन व स्पोर्ट्स बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
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