36 रन पर ऑल आउट से गाबा की जीत तक, रहाणे ने ऐसे लिखी इंडियन क्रिकेट की सबसे यादगार कहानी

भारतीय क्रिकेट के शांत योद्धा अजिंक्य रहाणे ने सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है. 12 साल के अपने शानदार करियर में उन्होंने कई मुश्किल पलों में टीम इंडिया को संभाला. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में मेलबर्न में उनकी कप्तानी और शतकीय पारी को कौन भूल सकता है.

Ajinkya Rahane: भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत और भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेकर अपने 12 साल लंबे करियर का अंत कर दिया. रहाणे के नाम भले ही 8,414 अंतरराष्ट्रीय रन दर्ज हों, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान मुश्किल हालात में टीम इंडिया को संभालने वाले खिलाड़ी और कप्तान की रही.

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की यादें

रहाणे का करियर आंकड़ों से ज्यादा उन पलों के लिए याद किया जाएगा, जब उन्होंने संकट में टीम को संभाला. इसकी सबसे बड़ी मिसाल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही. ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच चार मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मुकाबला पिछले साल 17 दिसंबर से शुरू हुआ था. मैच की पहली पारी में भारतीय टीम ने 244 रन बनाए थे, जिसके जवाब में आस्ट्रेलियाई टीम महज 191 रनों पर ऑल आउट हो गई थी.

हालांकि दूसरी पारी में इंडिया के बल्लेबाज पूरी तरह फ्लॉप रहे और पूरी टीम 36 रनों पर ऑल आउट हो गई. इसके बाद विराट कोहली पैटरनिटी लीव पर स्वदेश लौट गए और कप्तानी की जिम्मेदारी रहाणे के कंधों पर आ गई.

MCG की सेंचुरी ने बदल दी पूरी सीरीज

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले गए दूसरे टेस्ट में रहाणे ने कप्तान के तौर पर 112 रन की शानदार शतकीय पारी खेली. पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और नाथन लियोन जैसे गेंदबाजों के सामने उनकी यह पारी सिर्फ एक शतक नहीं, बल्कि पूरी टीम के आत्मविश्वास की वापसी थी. भारत ने पहली पारी में बढ़त हासिल की और मुकाबला आठ विकेट से जीत लिया.

इसके बाद सिडनी टेस्ट ड्रॉ रहा और फिर गाबा में युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर 2-1 से ऐतिहासिक सीरीज अपने नाम कर ली. इस पूरी सफलता की नींव मेलबर्न में रहाणे की कप्तानी और शतकीय पारी ने रखी थी.

टेस्ट (स्थान/वर्ष)विपक्षपरिणाम
धर्मशाला, 2017ऑस्ट्रेलियाभारत जीता
बेंगलुरु, 2018अफगानिस्तानभारत जीता
मेलबर्न, 2020ऑस्ट्रेलियाभारत जीता
सिडनी, 2021ऑस्ट्रेलियाड्रॉ
ब्रिस्बेन, 2021ऑस्ट्रेलियाभारत जीता
कानपुर, 2021न्यूजीलैंडड्रॉ

जीत को बना दिया और खास

रहाणे के करियर का एक और यादगार पल 2018 में सामने आया, जब भारत ने बेंगलुरु में अफगानिस्तान के खिलाफ पहला टेस्ट एक पारी और 262 रन से जीता. मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम ट्रॉफी के साथ फोटो खिंचवाने की तैयारी कर रही थी. तभी कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अफगानिस्तान के खिलाड़ियों को भी अपने साथ आने का न्योता दिया. रहाणे के इस फैसले ने सभी का दिल जीत लिया. अफगानिस्तान की पूरी टीम भारतीय खिलाड़ियों के साथ ट्रॉफी के पास खड़ी हुई और दोनों टीमों ने मिलकर तस्वीर खिंचवाई. इसके बाद अफगान खिलाड़ियों और उनके कोच ने भी रहाणे के इस खेलभावना से भरे कदम की जमकर सराहना की. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह तस्वीर आज भी खेल भावना की मिसाल मानी जाती है.

अजिंक्य रहाणे का करियर

प्रारूपअवधिमैचरनऔसतसर्वोच्च स्कोरशतकअर्धशतकस्ट्राइक रेट
टेस्ट2013–202385507738.46188122649.5
वनडे2011–201890296235.2611132478.63
टी20I2011–20162037520.836101113.29
कुल2011–202319584141551

शांत कप्तान, जिसने टीम को दिया भरोसा

रहाणे की कप्तानी का अंदाज हमेशा अलग रहा. वह मैदान पर ज्यादा आक्रामक नजर नहीं आते थे, लेकिन फैसले बेहद सटीक लेते थे. मेलबर्न टेस्ट में शुभमन गिल और मोहम्मद सिराज को मौका देना, ऋषभ पंत पर भरोसा जताना और रविचंद्रन अश्विन का आक्रामक इस्तेमाल करना उनकी रणनीति का हिस्सा था. उन्होंने छह टेस्ट में भारत की कप्तानी की और एक भी मैच नहीं हारे. चार मुकाबले जीते और दो ड्रॉ रहे. विदेशी सरजमीं पर उनके आठ टेस्ट शतक और संकट में खेली गई पारियां उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल करती हैं.

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By Abhijeet Kumar

अभिजीत कुमार युवा पत्रकार हैं, जिन्हें खेल और खासकर क्रिकेट की दुनिया को करीब से समझने और उसकी अनकही कहानियों को पाठकों तक पहुंचाने का जुनून है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम किया है.

वर्तमान में वह स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के लेखन, संपादन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी संभालते हैं. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आंकड़ों, रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से जुड़ी कहानियों की दुनिया है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर मैदान के पीछे की दिलचस्प घटनाओं तक, वह हर कहानी को सरल, सटीक और रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश करते हैं.

उनका मानना है कि एक अच्छी स्पोर्ट्स स्टोरी सिर्फ खबर नहीं बताती, बल्कि पाठक को उस पल का हिस्सा महसूस कराती है. यही सोच उनके लेखन की पहचान है और यही वजह है कि उनके आर्टिकल्स में खबर के साथ कहानी, संदर्भ और क्रिकेट का जुनून भी नजर आता है.

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